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Yash Johar Roasts Karan Johar: ‘कुछ कुछ होता है’ की सफलता के बाद खरीदी थी महंगी जैकेट, पिता ने कहा- ‘बहुत बुरी’

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Yash Johar roasts Karan Johar
Yash Johar roasts Karan Johar

बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे किस्से मशहूर हैं जो दर्शकों को गुदगुदाते भी हैं और अपनों के बीच की खूबसूरत बॉन्डिंग भी दिखाते हैं। ऐसा ही एक मजेदार वाकया तब सामने आया जब Yash Johar roasts Karan Johar की घटना सोशल मीडिया पर खुद करण जौहर ने साझा की। बॉलीवुड के दिग्गज फिल्म निर्माता स्वर्गीय यश जौहर अपने सादगी भरे अंदाज और बेहतरीन सेंस ऑफ ह्यूमर के लिए जाने जाते थे। जब साल 1998 में करण जौहर की पहली डायरेक्टोरियल फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर साबित हुई, तो करण ने अपनी ज़िंदगी की पहली महंगी डिज़ाइनर जैकेट खरीदी थी। लेकिन उस जैकेट को देखकर उनके पिता ने जो मजेदार प्रतिक्रिया दी, उसने करण का सारा स्वैग एक पल में हवा कर दिया।

जब पहली फिल्म की कामयाबी के बाद यश जौहर ने ली चुटकी

साल 1998 भारतीय सिनेमा के लिए बेहद खास साल माना जाता है। इस साल 25 वर्षीय युवा निर्देशक करण जौहर ने शाहरुख खान, काजोल और रानी मुखर्जी स्टारर फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ से निर्देशन की दुनिया में कदम रखा था। फिल्म ने रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। इस अभूतपूर्व सफलता ने धर्मा प्रोडक्शंस को एक नई बुलंदी पर पहुंचा दिया।

बचपन से ही फिल्मों के माहौल में पले-बढ़े करण जौहर हमेशा से फैशन और स्टाइल के बड़े शौकीन रहे हैं। सफलता के नशे और खुशी में डूबे करण ने सोचा कि अब वक्त आ गया है जब वह खुद को किसी खास तोहफे से नवाजें। लंदन यात्रा के दौरान उन्होंने एक मशहूर लग्जरी ब्रांड के स्टोर का रुख किया। लेकिन उन्हें इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि घर लौटने पर Yash Johar roasts Karan Johar का यह किस्सा उनके जीवन का सबसे यादगार संस्मरण बनने जा रहा है।

Yash Johar Roasts Karan Johar: बड़ब्री स्टोर का दिलचस्प किस्सा

लंदन की सड़कों पर घूमते हुए करण जौहर की नज़र मशहूर ब्रिटिश लग्जरी ब्रांड ‘बड़ब्री’ (Burberry) के स्टोर पर पड़ी। उस दौर में करण जौहर का वजन काफी बढ़ा हुआ था और वह प्लस-साइज के कपड़े पहनते थे। उस समय लग्जरी ब्रांड्स में बड़े साइज के ट्रेंडी कपड़े मिलना बेहद मुश्किल काम हुआ करता था।

करण जब स्टोर के अंदर गए, तो उन्होंने कई रैक्स खंगाले। आखिरकार उन्हें एक ऐसी डिज़ाइनर जैकेट मिली जो उनके साइज के अनुकूल थी। करण ने बिना देर किए उस महंगी जैकेट को खरीद लिया। उस वक्त उनके मन में यह गर्व था कि उन्होंने अपनी मेहनत की पहली बड़ी कमाई और सफलता के दम पर यह लग्जरी जैकेट खरीदी है। जब वह वापस भारत लौटे, तो वह इसे अपने पिता को दिखाने के लिए काफी उत्सुक थे। जब उन्होंने जैकेट पहनकर पिता के सामने वॉक किया, तो Yash Johar roasts Karan Johar का वह ऐतिहासिक डायलॉग सामने आया, जिसने माहौल को ठहाकों से भर दिया।

‘बेटा, ये बड़ब्री नहीं, बहुत बुरी है’

करण जौहर ने खुद अपने इंस्टाग्राम पोस्ट पर इस घटना का ब्योरा देते हुए लिखा था कि जैसे ही वह जैकेट पहनकर अपने पिता के कमरे में दाखिल हुए, उन्होंने बड़े गर्व और स्टाइल के साथ कहा, “पापा, देखिए ये बड़ब्री (Burberry) है!”

करण को उम्मीद थी कि पिता उनकी पसंद की तारीफ करेंगे या कम से कम बेटे की खुशी देखकर मुस्कुराएंगे। लेकिन यश जौहर ने चश्मा ठीक करते हुए करण को ऊपर से नीचे तक देखा। उन्होंने एक लंबी सांस ली और बेहद शांत, संजीदा चेहरे के साथ कहा— “बेटा, ये बड़ब्री नहीं… बहुत बुरी है!”

पिता का यह एक पंक्ति का जवाब सुनकर करण पहले तो पूरी तरह अवाक रह गए। उनका सारा फैशन सेंस और ब्रांड का घमंड एक झटके में चकनाचूर हो गया। लेकिन अगले ही पल दोनों बाप-बेटे ज़ोर-ज़ोर से हंस पड़े। जिस सादगी और हाजिरजवाबी के साथ यह बात कही गई, वही वजह है कि आज भी जब बॉलीवुड गलियारों में Yash Johar roasts Karan Johar की बात चलती है, तो लोग अपनी हंसी नहीं रोक पाते।

Yash Johar Roasts Karan Johar: बाप-बेटे की अनूठी और खूबसूरत बॉन्डिंग

यश जौहर और करण जौहर के बीच का रिश्ता सिर्फ एक पिता और बेटे का नहीं था, बल्कि वे दोनों सबसे अच्छे दोस्त, बिज़नेस पार्टनर और एक-दूसरे के सबसे बड़े मार्गदर्शक भी थे। यश जौहर ने अपने पूरे जीवन में संघर्ष देखा था। एक साधारण परिवार से निकलकर बॉलीवुड के बड़े निर्माता बनने तक का उनका सफर सादगी, ईमानदारी और ज़मीन से जुड़े रहने की मिसाल था।

यही वजह थी कि वह करण को हमेशा सफलता के बीच विनम्र रहने की सीख देते थे। जब भी करण किसी चीज़ को लेकर ज़्यादा उत्साहित या अति-आत्मविश्वासी होते, तो यश जौहर अपने मजाकिया अंदाज में उन्हें हकीकत का आईना दिखा देते थे। यह घटना दर्शाती है कि कैसे Yash Johar roasts Karan Johar के जरिए यश जी ने अपने बेटे को यह सिखाया कि महंगे कपड़े या ब्रांड्स आपकी पहचान नहीं बनाते, बल्कि आपका काम और सादगी आपको बड़ा बनाती है।

करण जौहर ने अक्सर अपने साक्षात्कारों में कहा है कि उनके पिता की यही खूबी उन्हें सबसे अलग बनाती थी। जब यश जौहर ने वह टिप्पणी की थी, तब उसमें कोई तंज या कड़वाहट नहीं थी, बल्कि विशुद्ध प्यार और मस्ती भरी डांट थी। करण कहते हैं कि वह जैकेट भले ही दुनिया के सबसे महंगे ब्रांड की थी, लेकिन पिता की वह बात किसी अनमोल सीख से कम नहीं थी।

फैशन के प्रति करण का जुनून और पिता की ज़मीनी सीख

हम सभी जानते हैं कि आज के दौर में करण जौहर को बॉलीवुड का ‘फैशन आइकन’ कहा जाता है। उनकी वॉर्डरोब में दुनिया के बड़े से बड़े ब्रांड्स के कपड़े, शूज और एक्सेसरीज़ मौजूद हैं। कई बार उनके अनोखे फैशन चॉइसेज को लेकर सोशल मीडिया पर मीम्स भी बनते हैं, लेकिन करण कभी इसकी परवाह नहीं करते।

करण अक्सर कहते हैं कि उनका यह अनोखा फैशन सेंस कोई आज का नहीं है, बल्कि यह उनकी पहली फिल्म के समय से ही चला आ रहा है। जब भी करण किसी पब्लिक इवेंट में कोई अजीबोगरीब या आउट-ऑफ-द-बॉक्स आउटफिट पहनते हैं, तो फैंस को अक्सर वही किस्सा याद आ जाता है जब Yash Johar roasts Karan Johar का वाकया हुआ था। करण खुद स्वीकार करते हैं कि भले ही आज वह फैशन के मामले में कितने भी प्रयोग कर लें, लेकिन उनके दिमाग में हमेशा अपने पिता की वह आवाज़ गूंजती रहती है कि पहनावा ऐसा होना चाहिए जो आपके व्यक्तित्व पर जंचे, न कि सिर्फ ब्रांड के नाम पर पहना जाए।

Yash Johar Roasts Karan Johar: सोशल मीडिया पर फैंस का रिएक्शन

जब करण जौहर ने अपने पिता की जयंती पर इस याद को सोशल मीडिया पर शेयर किया, तो बॉलीवुड सेलेब्रिटीज से लेकर आम फैंस तक सबने इस पर खूब प्यार लुटाया। कई बॉलीवुड सितारों ने कमेंट करते हुए लिखा कि यश जी का सेंस ऑफ ह्यूमर वाकई बेमिसाल था।

इस पोस्ट के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा कि यश जौहर की हाजिरजवाबी बिल्कुल भारतीय पिताओं जैसी थी, जो अपने बच्चों को ज़मीन पर रखना बखूबी जानते हैं। जिस तरह से Yash Johar roasts Karan Johar का यह किस्सा चर्चा में आया, उसने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि घर के बुजुर्गों की यही प्यारी नोक-झोंक परिवार को एक सूत्र में बांधकर रखती है।

बॉलीवुड के कई निर्देशकों और कलाकारों ने भी माना कि यश जी से मिलना हमेशा सकारात्मक ऊर्जा से भर देता था। चाहे सेट पर काम का कितना भी तनाव क्यों न हो, यश जौहर का एक छोटा सा जोक पूरे माहौल को हल्का कर देता था। इस किस्से ने यह साबित कर दिया कि पारिवारिक मूल्य और सादगी किसी भी चमक-दमक से कहीं ज्यादा मायने रखती है।

करण जौहर के जीवन पर पिता की अमिट छाप

साल 2004 में यश जौहर का निधन हो गया, जो करण जौहर के जीवन का सबसे बड़ा सदमा था। पिता के जाने के बाद करण ने अकेले ही धर्मा प्रोडक्शंस की बागडोर संभाली और उसे भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े प्रोडक्शन हाउस में बदल दिया। करण ने कई बार अपनी किताबों और बातचीत में कहा है कि वह आज जो कुछ भी हैं, अपने पिता की वजह से हैं।

करण जब भी कोई नया प्रोजेक्ट शुरू करते हैं, वह अपने पिता का आशीर्वाद लेना कभी नहीं भूलते। वह मानते हैं कि उनके पिता ने उन्हें केवल फिल्में बनाना ही नहीं सिखाया, बल्कि यह भी सिखाया कि लोगों की कद्र कैसे की जाती है। जब भी कभी Yash Johar roasts Karan Johar जैसी पुरानी यादें सामने आती हैं, तो करण के चेहरे पर एक भावुक मुस्कान आ जाती है। यह घटना केवल एक जैकेट पर दी गई प्रतिक्रिया नहीं थी, बल्कि एक पिता का अपने बेटे के प्रति वह निष्कपट प्यार था जो किसी बनावट या दिखावे से परे था।

निष्कर्ष (Conclusion)

आज के इस चकाचौंध भरे दौर में जहाँ लोग ब्रांड्स और लग्जरी के पीछे भागते हैं, यश जौहर का यह सरल और सटीक जवाब हर किसी के लिए एक सीख है। Filmy Galaxy की इस खास रिपोर्ट में यह किस्सा साफ दिखाता है कि ‘कुछ कुछ होता है’ जैसी ऐतिहासिक फिल्म देने के बाद भी एक पिता का अपने बेटे को यह याद दिलाना कि सादगी ही सबसे बड़ा गहना है, वाकई दिल को छू लेने वाला है।

यह मजेदार और भावनात्मक वाकया हमेशा भारतीय सिनेमा के सबसे प्यारे संस्मरणों में गिना जाएगा। जब भी कोई करण जौहर के वॉर्डरोब या फैशन की बात करेगा, तब-तब Yash Johar roasts Karan Johar की यह दास्तान मुस्कुराने की एक नई वजह देती रहेगी। करण जौहर और यश जौहर की यह बॉन्डिंग हमें सिखाती है कि चाहे आप शोहरत के कितने भी ऊंचे मुकाम पर क्यों न पहुंच जाएं, अपनों के साथ की गई हल्की-फुल्की हंसी-मजाक और ज़मीन से जुड़े रहने की सीख ही ज़िंदगी की असली दौलत होती है।

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