बॉलीवुड के दिग्गज फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली अपनी भव्य फिल्मों, बेमिसाल सेट्स और बारीकियों पर पैनी नजर रखने के लिए जाने जाते हैं। सिनेमाई दुनिया में उनकी बनाई हर फिल्म पर्दे पर एक पेंटिंग की तरह नजर आती है। हालांकि फिल्मों के साथ-साथ सेट पर उनके कड़े मिजाज और गुस्से की कहानियां भी अक्सर चर्चा में रहती हैं। अब बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता रजा मुराद ने फिल्ममेकर के इस व्यवहार पर खुलकर बात की है। Sanjay Leela Bhansali temper को लेकर इंडस्ट्री में चलने वाली बहसों के बीच रजा मुराद ने भंसाली का जोरदार बचाव किया है। उन्होंने साफ कहा कि भंसाली का गुस्सा उनकी कला और परफेक्शन की भूख से जुड़ा है, न कि किसी के प्रति व्यक्तिगत दुर्भावना से।

Sanjay Leela Bhansali Temper: रजा मुराद ने बताई सेट पर गुस्से की असली वजह

रजा मुराद ने संजय लीला भंसाली के साथ ‘गोलियों की रासलीला राम-लीला’ (2013) और ‘बाजीराव मस्तानी’ (2015) जैसी सुपरहिट फिल्मों में अहम भूमिकाएं निभाई हैं। उन्होंने भंसाली की कार्यशैली को बेहद करीब से देखा है। एक हालिया इंटरव्यू में अभिनेता ने कहा कि भंसाली जब किसी प्रोजेक्ट पर काम करते हैं, तो वह खुद को पूरी तरह समर्पित कर देते हैं।

इंटरव्यू में बात करते हुए उन्होंने कहा कि Sanjay Leela Bhansali temper असल में उनकी उस लगन का नतीजा है, जो वह हर फ्रेम में देखना चाहते हैं। अगर कोई तकनीशियन, क्रू मेंबर या मुख्य कलाकार उस विजन को पूरा करने में थोड़ी सी भी ढिलाई बरतता है, तो भंसाली अपना आपा खो बैठते हैं। रजा मुराद के मुताबिक, एक फिल्ममेकर को सेट पर अनुशासन और अपने विजन के प्रति सख्त होना ही पड़ता है।

रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा पर भी चिल्लाते देखा

रजा मुराद ने इस बातचीत में कई अनसुने किस्से भी साझा किए। उन्होंने बताया कि भंसाली के सेट पर कोई छोटा या बड़ा कलाकार नहीं होता, बल्कि हर कोई किरदार का हिस्सा होता है। उन्होंने कई बार खुद देखा है कि जब कोई सीन भंसाली की सोच के मुताबिक नहीं उभरता, तो वह बड़े-बड़े स्टार्स पर भी बरस पड़ते हैं।

उन्होंने रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा का उदाहरण देते हुए कहा कि ये तीनों इंडस्ट्री के टॉप सितारे हैं, लेकिन भंसाली ने कई मौकों पर इन सभी को भी सेट पर फटकार लगाई है। ऐसे क्षणों में Sanjay Leela Bhansali temper किसी स्टार पावर या स्टारडम के सामने नहीं झुकता। भंसाली का मकसद सिर्फ इतना होता है कि अभिनेता अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकले और पर्दे पर वह जादू पैदा करे जिसकी कहानी को दरकार है।

Sanjay Leela Bhansali Temper: क्या यह गुस्सा है या कला के प्रति जूनून?

सिनेमाई विशेषज्ञों और प्रशंसकों के बीच अक्सर यह बहस चलती है कि क्या काम निकलवाने के लिए चिल्लाना जरूरी है। इस पर रजा मुराद ने अपनी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने समझाया कि भंसाली का चिल्लाना किसी का अपमान करने के लिए नहीं होता। वह किसी से निजी दुश्मनी नहीं निकालते और पैकअप होते ही सब कुछ सामान्य हो जाता है।

फिल्म समीक्षकों का भी मानना है कि Sanjay Leela Bhansali temper उनकी क्रिएटिव फ्रस्ट्रेशन का रूप है। जब एक डायरेक्टर के दिमाग में फ्रेम की हर रोशनी, हर डायलॉग और हर एक्सप्रेशन तय होता है, तो मामूली चूक भी उसकी रचनात्मक प्रक्रिया को बाधित करती है। यही वजह है कि उनके साथ काम करने वाले कलाकार अक्सर कहते हैं कि भंसाली उनसे वह काम करवा लेते हैं जो उन्होंने खुद कभी सोचा भी नहीं होता।

सेट पर अनुशासन और बारीकियों की अहमियत

‘हम दिल दे चुके सनम’, ‘देवदास’, ‘ब्लैक’, ‘पद्मावत’ और ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ जैसी कालजयी फिल्में यूं ही नहीं बन जातीं। भंसाली की फिल्मों की एक-एक फ्रेम में महीनों की मेहनत और शोध छुपा होता है। कॉस्ट्यूम से लेकर बैकग्राउंड में रखी मोमबत्ती तक का कोण तय किया जाता है।

रजा मुराद ने बताया कि जब इतना बड़ा जोखिम और बजट लगा हो, तो निर्देशक की जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे दबाव वाले माहौल में Sanjay Leela Bhansali temper का उभरना स्वाभाविक है। अगर डायरेक्टर सेट पर नरम पड़ जाए, तो फिल्म का मूल तत्व खो सकता है। कड़े अनुशासन के बिना इतने बड़े स्तर की भव्यता को संभालना नामुमकिन है।

कलाकारों के नजरिए से भंसाली की कार्यशैली

रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण कई इंटरव्यूज में खुद स्वीकार कर चुके हैं कि भंसाली के साथ काम करना किसी तपस्या से कम नहीं होता। रणवीर ने एक बार कहा था कि भंसाली एक अभिनेता की आत्मा को निचोड़ लेते हैं ताकि असली भावनाएं बाहर आ सकें। दीपिका ने भी माना था कि ‘पद्मावत’ के दौरान वह मानसिक रूप से थक जाती थीं।

बावजूद इसके, दोनों सितारे भंसाली को अपना सबसे बड़ा मेंटर मानते हैं। इससे यह साफ होता है कि Sanjay Leela Bhansali temper भले ही सेट पर तनाव पैदा करता हो, लेकिन उसका अंतिम परिणाम हमेशा स्क्रीन पर स्वर्णिम रूप में दिखाई देता है। अभिनेता अपनी बेहतरीन परफॉर्मेंस के लिए भंसाली के उसी सख्त रवैये को श्रेय देते हैं।

Sanjay Leela Bhansali Temper को लेकर रजा मुराद का दो टूक संदेश

रजा मुराद ने उन लोगों पर भी निशाना साधा जो बिना हकीकत जाने फिल्ममेकर की आलोचना करते हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग सेट पर मौजूद नहीं रहते, उन्हें केवल चिल्लाने की आवाजें सुनाई देती हैं, लेकिन उसके पीछे की भावना समझ नहीं आती।

मुराद के शब्दों में, जब तक एक डायरेक्टर के भीतर आग नहीं होगी, तब तक वह मास्टरपीस नहीं बना सकता। उन्होंने दो टूक कहा कि Sanjay Leela Bhansali temper को गलत तरीके से पेश किया जाता है। अगर उनका यह रूप नहीं होता, तो भारतीय सिनेमा को ‘बाजीराव मस्तानी’ या ‘देवदास’ जैसी महान कृतियां कभी नहीं मिल पातीं।

हॉलीवुड और विश्व सिनेमा में सख्त निर्देशकों की परंपरा

यह कोई पहली बार नहीं है जब किसी महान निर्देशक के गुस्से की चर्चा हुई हो। हॉलीवुड के अल्फ्रेड हिचकॉक, स्टेनली कुब्रिक, जेम्स कैमरून और डेविड फिंचर जैसे दिग्गज निर्देशकों के बारे में भी सेट पर जरूरत से ज्यादा सख्त होने के किस्से मशहूर हैं। जेम्स कैमरून तो सेट पर फोन तक तोड़ देने के लिए जाने जाते थे।

सिनेमा का इतिहास गवाह है कि जो निर्देशक अपनी दृष्टि से कोई समझौता नहीं करते, उनका स्वभाव अक्सर ऐसा ही होता है। इसलिए Sanjay Leela Bhansali temper को भी विश्व सिनेमा के उसी परफेक्शनिस्ट खांचे में देखा जाना चाहिए, जहां निर्देशक अपनी कला के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहता है।

फिल्म इंडस्ट्री और सोशल मीडिया पर इस बयान का असर

रजा मुराद के इस बेबाक बयान के बाद सोशल मीडिया और फिल्म गलियारों में एक नई चर्चा शुरू हो गई है। Filmy Galaxy की रिपोर्ट के मुताबिक, कई सिनेमा प्रेमियों ने रजा मुराद की इस बात का पुरजोर समर्थन किया है। लोगों का कहना है कि जब परिणाम ‘बाजीराव मस्तानी’ जैसा मिले, तो सेट पर थोड़ी सख्ती पूरी तरह जायज है।

नेटिजन्स लिख रहे हैं कि Sanjay Leela Bhansali temper के बावजूद हर बड़ा एक्टर उनके साथ काम करने के लिए लाइन लगाकर खड़ा रहता है। आलिया भट्ट, रणबीर कपूर और विक्की कौशल जैसे सितारे उनके अगले प्रोजेक्ट ‘लव एंड वॉर’ का हिस्सा हैं, जो यह साबित करता है कि कलाकारों को उनके गुस्से से ज्यादा उनके हुनर पर भरोसा है।

रजा मुराद की इस स्पष्टवादिता ने भंसाली के काम करने के तरीके को एक नया संदर्भ दिया है। कला की दुनिया में असाधारण कृतियों का निर्माण कभी भी आसान रास्तों से नहीं होता। जब कोई फिल्ममेकर परदे पर इतिहास रचने की कोशिश करता है, तो सेट पर केवल तालियां नहीं, बल्कि तीखी आवाजें भी गूंजती हैं। भंसाली का गुस्सा उनकी कला की वही कीमत है, जिसे उनके साथ काम करने वाला हर सच्चा कलाकार खुशी-खुशी चुकाने को तैयार रहता है।

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