27 जून 2026 की यह सुबह तमिल सिनेमा ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय फिल्म जगत के लिए एक बेहद दुखद खबर लेकर आई। तमिल सिनेमा के दिग्गज अभिनेता, निर्देशक और बेहतरीन पटकथा लेखक K. Bhagyaraj अब हमारे बीच नहीं रहे। 73 वर्ष की आयु में चेन्नई में कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा पड़ने) के कारण उनका अचानक निधन हो गया। सिनेमा जगत में उन्हें सम्मान से ‘स्क्रीनप्ले किंग’ कहा जाता था। K. Bhagyaraj के जाने से न केवल कोलीवुड बल्कि पूरे भारतीय सिनेमा के एक सुनहरे, रचनात्मक और बेहद प्रभावशाली पटकथा लेखन के युग का अंत हो गया है।
इस ब्लॉग में हम सिनेमा के इसी महान जादूगर और स्क्रीनप्ले के बेताज बादशाह K. Bhagyaraj के उस सफर को याद करेंगे, जिसने आम कहानियों को पर्दे पर अमर बना दिया।
K. Bhagyaraj क्यों कहलाए पटकथा के ‘स्क्रीनप्ले किंग’?
सिनेमा में कहानी सब लिखते हैं, लेकिन उस कहानी को इस तरह पर्दे पर उतारना कि दर्शक अपनी सीट से हिल न पाए, यह हुनर हर किसी के पास नहीं होता। K. Bhagyaraj के पास यही वो जादुई कला थी जिसके कारण उन्हें स्क्रीनप्ले का किंग माना गया। उनका मानना था कि अगर आपकी पटकथा मजबूत है, तो एक साधारण बजट की फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच सकती है।
70 और 80 के दशक में जब तमिल सिनेमा में बड़े-बड़े एक्शन हीरो और भव्य सेट का दौर चल रहा था, तब K. Bhagyaraj ने बहुत ही साधारण, मध्यवर्गीय और जमीनी कहानियों को चुना। उनकी फिल्मों की सबसे बड़ी खासियत होती थी—बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग, घरेलू उलझनों को सुलझाते किरदार और सस्पेंस से भरी स्क्रिप्ट। यही कारण है कि आज भी फिल्म मेकिंग के छात्र K. Bhagyaraj की फिल्मों को स्क्रीनप्ले की गाइड बुक मानकर पढ़ते हैं।
शुरुआती संघर्ष और गुरु भारतइराजा का साथ
महान फिल्ममेकर K. Bhagyaraj का जन्म 7 जनवरी 1953 को तमिलनाडु के वेल्लकोइल में हुआ था। बचपन से ही सिनेमा के प्रति उनका झुकाव उन्हें चेन्नई खींच लाया। लेकिन उस दौर में बिना किसी गॉडफादर के फिल्म इंडस्ट्री में जगह बनाना बेहद मुश्किल था। K. Bhagyaraj का शुरुआती सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा और उन्होंने कड़ा परिश्रम किया।
उनके करियर को सही दिशा तब मिली जब उनकी मुलाकात महान निर्देशक भारतइराजा से हुई। उन्होंने K. Bhagyaraj के भीतर छुपे हुए लेखक को पहचान लिया। भारतइराजा ने उन्हें अपनी फिल्मों में सहायक निर्देशक (Assistant Director) और स्क्रिप्ट राइटर के रूप में काम दिया। 16 Vayathinile (1977) जैसी क्लासिक फिल्मों में पर्दे के पीछे रहकर K. Bhagyaraj ने काम किया और स्क्रीनप्ले की बारीकियों को बहुत गहराई से सीखा।
बतौर निर्देशक और अभिनेता K. Bhagyaraj का स्वर्णिम दौर
1979 में K. Bhagyaraj ने फिल्म Suvarilladha Chithirangal से बतौर निर्देशक कदम रखा। यह फिल्म समीक्षकों को बेहद पसंद आई। एक अभिनेता के तौर पर भी K. Bhagyaraj ने अपनी एक अलग पहचान बनाई। वे कोई पारंपरिक सिक्स-पैक एब्स वाले हीरो नहीं थे; वे एक सीधे-साधे, बगल में झोला लटकाए हुए आम इंसान जैसे दिखते थे, जिससे दर्शक तुरंत खुद को जोड़ लेते थे।
उनकी कुछ सबसे ब्लॉकबस्टर और यादगार फिल्मों की सूची इस प्रकार है:
| फिल्म का नाम | रिलीज का वर्ष | K. Bhagyaraj का योगदान | विशेषता |
| Mundhanai Mudichu | 1983 | अभिनेता, निर्देशक, लेखक | तमिल सिनेमा की सबसे बड़ी हिट्स में से एक, जिसने सोशल ड्रामा को नया रूप दिया। |
| Antha Ezhu Naatkal | 1981 | अभिनेता, निर्देशक, लेखक | एक अधूरी प्रेम कहानी और त्याग पर आधारित बेहद भावुक स्क्रीनप्ले। |
| Darling, Darling, Darling | 1982 | अभिनेता, निर्देशक | रोमांटिक कॉमेडी जिसने युवाओं के बीच धूम मचा दी थी। |
| Aakhree Raasta (Hindi) | 1986 | निर्देशक, लेखक | अमिताभ बच्चन की डबल रोल वाली यह कल्ट क्लासिक फिल्म K. Bhagyaraj की ही तमिल फिल्म की रीमेक थी। |
K. Bhagyaraj का बॉलीवुड कनेक्शन: जब अमिताभ बच्चन के साथ रचा इतिहास
उनका जादू सिर्फ दक्षिण भारत तक ही सीमित नहीं रहा। हिंदी सिनेमा के शहंशाह अमिताभ बच्चन भी K. Bhagyaraj की लेखनी के बहुत बड़े मुरीद थे। 1986 में आई बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्म आखरी रास्ता (Aakhree Raasta) का निर्देशन K. Bhagyaraj ने ही किया था। इस फिल्म की कहानी और पटकथा मूल रूप से उन्होंने ही लिखी थी।
अमिताभ बच्चन ने एक इंटरव्यू में स्वीकार किया था कि K. Bhagyaraj जिस स्पष्टता के साथ दृश्यों को समझाते थे और किरदारों के इमोशन को पेपर पर उतारते थे, वह वाकई अद्भुत था। पिता और पुत्र के टकराव की वह कहानी आज भी हिंदी सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ ड्रामा फिल्मों में गिनी जाती है। यह फिल्म इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि K. Bhagyaraj की कला की कोई भाषाई सीमा नहीं थी।
व्यक्तिगत जीवन और शालीन व्यक्तित्व
सिनेमा के पर्दे पर जितने वे मजेदार और क्रिएटिव थे, असल जिंदगी में K. Bhagyaraj उतने ही शांत, सुलझे हुए और शालीन इंसान थे। उन्होंने मशहूर अभिनेत्री पूर्णिमा जयराम से शादी की, जिन्होंने कई फिल्मों में उनके साथ काम भी किया। उनके दो बच्चे हैं—बेटी सरन्या और बेटा शांतनु।
K. Bhagyaraj ने हमेशा विवादों से दूर रहकर सिर्फ अपने काम पर ध्यान केंद्रित किया। नई पीढ़ी के निर्देशकों के लिए वे एक मार्गदर्शक की तरह थे। जब भी कोई युवा लेखक उनके पास अपनी स्क्रिप्ट लेकर जाता था, K. Bhagyaraj बहुत ही प्यार से उसकी कमियों को सुधारते थे और उसे बेहतर करने की प्रेरणा देते थे।
आखिरी विदा: सिनेमा जगत में पसरा सन्नाटा
27 जून 2026 की सुबह चेन्नई स्थित उनके आवास पर जब उन्हें अचानक छाती में दर्द हुआ, तो परिवार वाले उन्हें तुरंत अपोलो अस्पताल ले गए। डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बाद भी K. Bhagyaraj को बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरी फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है और घोषणा की है कि सिनेमा में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए K. Bhagyaraj का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान (State Honours) के साथ किया जाएगा। कमल हासन, रजनीकांत, थलपति विजय समेत दक्षिण और हिंदी सिनेमा के तमाम बड़े सितारों ने सोशल मीडिया पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
“सिनेमा ने आज अपना सबसे बेहतरीन लेखक और एक दूरदर्शी मार्गदर्शक खो दिया है। स्क्रीनप्ले को कैसे जिया जाता है, यह हमने भाग्यराज से सीखा।”
— कमल हासन
निष्कर्ष: अमर रहेगी K. Bhagyaraj की विरासत
भले ही K. Bhagyaraj आज हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी फिल्में, उनके लिखे अमर किरदार और उनकी अनूठी पटकथा शैली हमेशा जीवित रहेगी। जब-जब भारतीय सिनेमा में एक बेहतरीन और कसी हुई स्क्रिप्ट की बात होगी, तब-तब K. Bhagyaraj का नाम बड़े ही आदर और सम्मान के साथ लिया जाएगा।
उन्होंने हमें सिखाया कि सिनेमा सिर्फ बड़े बजट से नहीं, बल्कि इंसानी जज्बातों और एक मजबूत कहानी से बनता है। महान पटकथा लेखक, बेमिसाल अभिनेता और एक अद्भुत निर्देशक K. Bhagyaraj को हमारी ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि। अलविदा, स्क्रीनप्ले किंग!



