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Prakash Raj granted bail Bengaluru court: मल्टीपल वोटर आईडी केस में अभिनेता को मिली बड़ी राहत, कोर्ट ने वापस लिया NBW

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Prakash Raj granted bail Bengaluru court
Prakash Raj granted bail Bengaluru court

मल्टीपल वोटर आईडी रखने के आरोपों से घिरे बहुभाषी अभिनेता प्रकाश राज को आखिरकार कानूनी मोर्चे पर एक बड़ी राहत मिल गई है। हाल ही में खबर आई है कि Prakash Raj granted bail Bengaluru court, जिसके बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस केस की काफी चर्चा हो रही है। बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने न सिर्फ अभिनेता के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (NBW) को वापस ले लिया, बल्कि उन्हें इस मामले में नियमित जमानत भी दे दी है।

यह मामला पिछले कुछ समय से लगातार कानूनी सुर्खियों में बना हुआ था। प्रकाश राज पर चुनावी नियमों का उल्लंघन करने के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें पेश होने के लिए कई बार समन भेजे थे। हालांकि, लगातार अदालती सुनवाइयों में शामिल न होने के चलते उनके खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। इस वारंट के जारी होने के बाद से ही अभिनेता की मुश्किलें बढ़ती दिख रही थीं, लेकिन अब कोर्ट के ताजा फैसले से उन्होंने बड़ी राहत की सांस ली है।

1. Prakash Raj granted bail Bengaluru court: जानिए क्या है 2019 का पूरा विवाद

इस पूरे मामले की जड़ें साल 2019 के लोकसभा चुनावों से जुड़ी हुई हैं। उस समय प्रकाश राज ने बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट से एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। चुनाव लड़ने के दौरान ही उन पर चुनावी नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगा था। शहर के एक स्थानीय वकील के. दिलीप कुमार ने साल 2023 में कोर्ट में एक निजी शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अभिनेता का नाम देश के अलग-अलग राज्यों की कुल चार वोटर सूचियों में दर्ज है।

चार अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों का मामला

शिकायतकर्ता के मुताबिक, प्रकाश राज का नाम बेंगलुरु के शांतिनगर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में तो था ही, इसके अलावा तमिलनाडु के चेन्नई की वेलाचेरी सीट पर दो जगहों पर और तेलंगाना के सेरिलिंगमपल्ली विधानसभा क्षेत्र में भी दर्ज था। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (Representation of the People Act, 1950) के नियमों के अनुसार, भारत का कोई भी नागरिक देश में सिर्फ एक ही जगह पर अपना वोटर आईडी कार्ड रख सकता है या मतदाता के रूप में रजिस्टर्ड हो सकता है। एक से ज्यादा जगहों पर नाम रखना कानूनी रूप से एक दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है。

चुनाव आयोग से लेकर अदालत तक का सफर

शिकायतकर्ता वकील दिलीप कुमार ने सबसे पहले इस मामले को लेकर नागरिक प्रशासन और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) का दरवाजा खटखटाया था। उनका आरोप था कि इन अथॉरिटीज की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई न होने के बाद ही उन्हें बेंगलुरु की विशेष अदालत का रुख करना पड़ा。 कोर्ट ने अगस्त 2025 में इस मामले पर संज्ञान लेते हुए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 और 125(ए) के तहत अपराधों की जांच शुरू की थी और अभिनेता को अदालत में हाजिर होने के लिए समन जारी करने का आदेश दिया था।

2. कोर्ट में अभिनेता की व्यक्तिगत पेशी और Prakash Raj granted bail Bengaluru court की कानूनी प्रक्रिया

समन जारी होने के बाद भी जब प्रकाश राज कई तारीखों पर अदालत के सामने पेश नहीं हुए, तो बेंगलुरु की 48वीं एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) कोर्ट ने सख्त कदम उठाया。 अदालत ने उनके खिलाफ तीन बार गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया था। आखिरी वारंट जून 2026 में जारी किया गया था और मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 जुलाई 2026 की तारीख तय की गई थी। इस कानूनी दबाव के बीच, शुक्रवार (10 जुलाई 2026) को अभिनेता अपने वकीलों की टीम के साथ बेंगलुरु की स्पेशल कोर्ट में खुद व्यक्तिगत रूप से हाजिर हुए。

अदालत में वकीलों की दलीलें

सुनवाई के दौरान प्रकाश राज के वकीलों ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि अभिनेता को कोर्ट की तरफ से भेजा गया कोई भी समन या नोटिस सीधे तौर पर कभी मिला ही नहीं था। वकीलों ने तर्क दिया कि अभिनेता को इस पूरे अदालती मामले और अपने खिलाफ जारी वारंट की जानकारी केवल मीडिया रिपोर्ट्स और अन्य बाहरी स्रोतों के माध्यम से मिली थी। जैसे ही उन्हें इस बात का पता चला, उन्होंने कानून का सम्मान करते हुए तुरंत अदालत में खुद पेश होने का फैसला किया।

4,000 रुपये के निजी मुचलके पर मिली राहत

इसके साथ ही अभिनेता के पक्ष ने कोर्ट को यह भी जानकारी दी कि प्रकाश राज का नाम अब तमिलनाडु की वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यान से सुनने और अभिनेता की व्यक्तिगत उपस्थिति को देखते हुए उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (NBW) को तुरंत रद्द (Recall) कर दिया。 इसके बाद अदालत ने प्रकाश राज को 4,000 रुपये के नकद मुचलके (Cash Surety) पर सशर्त नियमित जमानत दे दी, जिससे इस वारंट के कारण पैदा हुई तात्कालिक कानूनी मुश्किलें पूरी तरह खत्म हो गईं।

3. सोशल मीडिया पर Prakash Raj granted bail Bengaluru court के फैसले के बाद फैंस के रिएक्शंस

प्रकाश राज को बेंगलुरु कोर्ट से जमानत मिलने की खबर जैसे ही मीडिया में आई, सोशल मीडिया पर तुरंत प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। प्रकाश राज सिर्फ साउथ सिनेमा ही नहीं, बल्कि बॉलीवुड के भी एक बेहद लोकप्रिय अभिनेता हैं और अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। यही वजह है कि उनके इस केस पर इंटरनेट यूजर्स दो धड़ों में बंट गए हैं। जहां एक तरफ उनके फैंस कोर्ट के इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग उनके ऊपर लगे आरोपों को लेकर अभी भी सवाल उठा रहे हैं।

इंटरनेट पर छिड़ी बहस

एक्स (पहले ट्विटर) पर एक फैन ने लिखा, “कानून और न्याय व्यवस्था पर हमारा भरोसा एक बार फिर मजबूत हुआ है। प्रकाश राज सर को झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की जा रही थी।” वहीं, एक अन्य यूजर ने दूसरी राय रखते हुए लिखा, “एक से ज्यादा वोटर आईडी रखना देश के कानून का उल्लंघन है, भले ही उन्हें जमानत मिल गई हो, लेकिन उन्हें यह साफ करना चाहिए कि उनके नाम चार जगहों पर क्यों थे।”

आगे क्या होगी इस मामले की दिशा?

भले ही प्रकाश राज को गैर-जमानती वारंट से मुक्ति मिल गई हो और जमानत मंजूर हो चुकी हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह केस पूरी तरह खत्म हो गया है。 कोर्ट ने सिर्फ वारंट को वापस लिया है, जबकि मल्टीपल वोटर आईडी कार्ड रखने के मूल आरोपों पर कानूनी ट्रायल आगे भी जारी रहेगा。 आने वाले समय में अदालत यह तय करेगी कि क्या वास्तव में अभिनेता की तरफ से कोई जानबूझकर चुनावी धांधली की गई थी या फिर यह केवल एक तकनीकी गड़बड़ी का मामला था। फिलहाल के लिए, बेंगलुरु कोर्ट का यह फैसला प्रकाश राज के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है।

निष्कर्ष (Conclusion)

इस पूरे कानूनी घटनाक्रम से यह साफ होता है कि देश में कानून सबके लिए बराबर है, चाहे वह कोई आम नागरिक हो या Filmy Galaxy का कोई बड़ा सेलिब्रिटी। प्रकाश राज ने कोर्ट में खुद पेश होकर यह साबित किया कि वे न्यायपालिका का सम्मान करते हैं। 4,000 रुपये के मुचलके पर मिली इस जमानत ने उन्हें जेल जाने के तात्कालिक खतरे से तो बचा लिया है, लेकिन अब हर किसी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जुलाई के आखिरी हफ़्तों में होने वाली अगली सुनवाइयों में कोर्ट इस केस पर क्या रुख अपनाता है।

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