Saturday, July 18, 2026

Sonam Wangchuk hunger strike: सोनम वांगचुक पर हुई कार्रवाई से भड़के प्रकाश राज और विशाल ददलानी, प्रशासन को कहा ‘शर्मनाक’

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लद्दाख के जल, जंगल, जमीन और वहां के स्थानीय लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए पिछले लंबे समय से संघर्ष कर रहे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर सुर्खियों में हैं। लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने और उसे पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर दिल्ली और लेह के अलग-अलग मोर्चों पर उनका आंदोलन जारी है। इस बीच, शांतिपूर्ण ढंग से चल रहे Sonam Wangchuk hunger strike को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन द्वारा सोनम वांगचुक को बलपूर्वक अनशन स्थल से हटाने और हिरासत में लेने की कार्रवाई की गई है।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही देश भर में आक्रोश फैल गया है। मनोरंजन जगत के दिग्गज अभिनेता प्रकाश राज और मशहूर संगीतकार विशाल ददलानी ने प्रशासन के इस रवैये पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बेहद ‘शर्मनाक’ दिन बताया है।

कौन हैं सोनम वांगचुक और क्यों कर रहे हैं आंदोलन?

सोनम वांगचुक एक विश्व प्रसिद्ध इंजीनियर, इनोवेटर और शिक्षा सुधारक हैं, जिन्हें उनके पर्यावरण अनुकूल आविष्कारों (जैसे आइस स्तूपा) के लिए जाना जाता है। पिछले कुछ वर्षों से वे लद्दाख के नाजुक ग्लेशियरों और वहां की संस्कृति को औद्योगिक शोषण से बचाने के लिए लगातार आवाज उठा रहे हैं। उनकी मुख्य मांग यह है कि केंद्र सरकार लद्दाख को स्वायत्तता प्रदान करे ताकि वहां की जमीन और पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके।

बॉलीवुड में फूटा गुस्सा और Sonam Wangchuk hunger strike पर पुलिसिया कार्रवाई का विरोध

प्रशासन द्वारा सोनम वांगचुक को जबरन हटाए जाने की घटना ने कला और सिनेमा जगत के उन लोगों को झकझोर कर रख दिया है जो सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहते हैं। इस कार्रवाई के तुरंत बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर Sonam Wangchuk hunger strike को लेकर समर्थन की बाढ़ आ गई।

प्रकाश राज ने सीधे तौर पर प्रशासन को घेरा

दिग्गज अभिनेता प्रकाश राज, जो खुद पहले भी सोनम वांगचुक के समर्थन में लद्दाख का दौरा कर चुके हैं और उनके साथ अनशन पर बैठ चुके हैं, ने इस घटना पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कार्रवाई का वीडियो साझा करते हुए सीधे तौर पर अधिकारियों और सरकार को आड़े हाथों लिया। प्रकाश राज ने लिखा, “यह बेहद शर्मनाक (Shameful) है। एक ऐसा व्यक्ति जो हमारे पर्यावरण, हमारे बच्चों के भविष्य और लद्दाख की सुरक्षा के लिए बिना किसी हिंसा के लड़ रहा है, उसके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है? क्या शांतिपूर्ण आवाज उठाना अब इस देश में अपराध हो गया है?”

विशाल ददलानी ने इसे बताया मौलिक अधिकारों का हनन

वहीं दूसरी ओर, बॉलीवुड के जाने-माने संगीतकार और गायक विशाल ददलानी ने भी इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि एक सच्चे देशभक्त और गांधीवादी तरीके से आंदोलन करने वाले इंसान को इस तरह बलपूर्वक उठाना लोकतंत्र की मूल आत्मा पर चोट है। उन्होंने इसे प्रशासन की तानाशाही बताते हुए लिखा कि जब कोई व्यक्ति देश के भविष्य के लिए भूखा बैठा हो, तो उसे सुरक्षा देना सरकार का काम है, न कि उसकी आवाज को दबाना।

देश भर में क्यों चर्चा का विषय बनी Sonam Wangchuk hunger strike और क्या हैं स्थानीय मांगें?

लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद से ही वहां के स्थानीय लोगों में अपनी पहचान, नौकरियों और जमीन को लेकर असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है। यही वजह है कि Sonam Wangchuk hunger strike सिर्फ एक व्यक्ति का आंदोलन नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे लद्दाख की सामूहिक आवाज बन चुका है।

आंदोलन की प्रमुख मांगें जिन पर गतिरोध जारी है:

  • छठी अनुसूची (Sixth Schedule): इसके तहत लद्दाख को स्वायत्त आदिवासी जिलों का दर्जा मिलेगा, जिससे स्थानीय लोगों को अपनी जमीन और संसाधनों के प्रबंधन का कानूनी अधिकार प्राप्त होगा।
  • पूर्ण राज्य का दर्जा: लद्दाख के नागरिक चाहते हैं कि उन्हें एक पूर्ण राज्य का दर्जा मिले ताकि उनकी अपनी चुनी हुई सरकार हो, न कि केवल केंद्र द्वारा नियुक्त उपराज्यपाल (LG) का शासन।
  • पर्यावरण संरक्षण: लद्दाख के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को बड़े उद्योगों और खनन माफियाओं से बचाना, ताकि वहां के ग्लेशियर सुरक्षित रह सकें।

प्रशासन का तर्क है कि कानून-व्यवस्था और सोनम वांगचुक के गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें वहां से हटाना जरूरी था। लेकिन प्रदर्शनकारियों और सिविल सोसाइटी का कहना है कि यह केवल आंदोलन को कमजोर करने और जनता का ध्यान भटकाने की एक कोशिश है।

लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल उठाती Sonam Wangchuk hunger strike और आगे की राह

सोनम वांगचुक हमेशा से महात्मा गांधी के दिखाए अहिंसा और सत्याग्रह के रास्ते पर चलते आए हैं। ऐसे में उनके साथ हुई यह जबरदस्ती देश के बुद्धिजीवियों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों को सोचने पर मजबूर करती है। Sonam Wangchuk hunger strike के दौरान हुई इस प्रशासनिक कार्रवाई ने यह बहस दोबारा छेड़ दी है कि क्या आधुनिक भारत में शांतिपूर्ण असहमति के लिए कोई जगह बची है?

कला जगत और जनता का साथ आना क्यों जरूरी है?

प्रकाश राज और विशाल ददलानी जैसी मशहूर हस्तियों का इस मुद्दे पर खुलकर बोलना बेहद महत्वपूर्ण है। जब सिनेमा और संगीत जगत से जुड़े लोग समाज के गंभीर मुद्दों पर स्टैंड लेते हैं, तो वह आवाज दूर तक जाती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित करती है। लद्दाख के ग्लेशियर सिर्फ लद्दाख के लिए नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत की नदियों और पानी के स्रोत हैं। अगर आज सोनम वांगचुक की आवाज को दबा दिया गया, तो आने वाले समय में पर्यावरण को होने वाले नुकसान की भरपाई कोई नहीं कर पाएगा।

निष्कर्ष

सोनम वांगचुक पर हुई इस कार्रवाई ने भले ही उन्हें शारीरिक रूप से अनशन स्थल से दूर कर दिया हो, लेकिन इसने उनके आंदोलन को और अधिक मजबूत बना दिया है। प्रकाश राज और विशाल ददलानी का आक्रोश देश के करोड़ों जागरूक नागरिकों की भावना को दर्शाता है। सरकार को चाहिए कि वह बल प्रयोग करने के बजाय लद्दाख के प्रतिनिधियों से मेज पर बैठकर बातचीत करे और उनकी जायज मांगों का समाधान निकाले। filmygalaxy की इस रिपोर्ट के अनुसार, लोकतंत्र की असली खूबसूरती संवाद में है, दमन में नहीं।

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