भारतीय सिनेमा के दिग्गज और मंझे हुए अभिनेता अनुपम खेर के करियर में कई ऐसे मील के पत्थर आए हैं, जिन्होंने बॉलीवुड में अभिनय की परिभाषा बदल दी। हाल ही में फिल्म उद्योग में एक खास मौका आया जब Anupam Kher Karma 40 years का जश्न मनाया गया। साल 1986 में रिलीज हुई सुभाष घई की सुपरहिट फिल्म ‘कर्मा’ को चार दशक पूरे हो चुके हैं। इस ऐतिहासिक मौके पर अनुपम खेर ने अपने शुरुआती दिनों और इस फिल्म से जुड़ी यादों को ताजा करते हुए एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि भले ही फिल्म ‘सारांश’ ने उन्हें एक संजीदा अभिनेता के रूप में स्थापित किया था, लेकिन ‘कर्मा’ में उनके आइकॉनिक किरदार ‘डॉक्टर डैंग’ ने उन्हें रातों-रात एक कमर्शियल स्टार बना दिया था।

फिल्म ‘कर्मा’ में अनुपम खेर का विलेन अवतार इतना खौफनाक और असरदार था कि दर्शक सिनेमाघरों में उनके दृश्यों को देखकर सिहर उठते थे। आइए जानते हैं कि इस खास मौके पर अनुपम खेर ने अपने करियर और इस कल्ट क्लासिक फिल्म को लेकर क्या कुछ कहा।

Anupam Kher Karma 40 Years: ‘सारांश’ से ‘कर्मा’ तक का यादगार सफर

अनुपम खेर ने अपने करियर की शुरुआत बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में की थी। महेश भट्ट की फिल्म ‘सारांश’ (1984) में उन्होंने महज 28 साल की उम्र में एक वृद्ध पिता का किरदार निभाकर सभी को चौंका दिया था। हालांकि, Anupam Kher Karma 40 years के पड़ाव पर बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘सारांश’ ने उन्हें क्रिटिक्स की तारीफ और एक्टिंग की दुनिया में पहचान तो दी, लेकिन आम जनता और मुख्यधारा सिनेमा में उनका दबदबा ‘कर्मा’ के बाद ही कायम हुआ।

सुभाष घई के निर्देशन में बनी फिल्म ‘कर्मा’ ने अनुपम खेर को बॉलीवुड के सबसे बड़े और सबसे महंगे खलनायकों की सूची में ला खड़ा किया। इस फिल्म के बाद उन्हें व्यावसायिक सिनेमा (Commercial Cinema) में बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स मिलने शुरू हो गए थे।

‘डॉक्टर डैंग’ का आइकॉनिक रोल: जिसने अनुपम खेर को बनाया कमर्शियल स्टार

जब भी बॉलीवुड के सबसे खौफनाक और यादगार खलनायकों (Villains) की बात होती है, तो ‘डॉक्टर डैंग’ का नाम सबसे ऊपर आता है। Anupam Kher Karma 40 years के सफर को याद करते हुए एक्टर ने बताया कि इस किरदार के डायलॉग्स और उनके हाव-भाव ने दर्शकों के दिलों पर गहरा प्रभाव छोड़ा था।

फिल्म में दिलीप कुमार (राणा विश्वप्रताप सिंह) के साथ अनुपम खेर के आमने-सामने के सीन भारतीय सिनेमा के सबसे बेहतरीन दृश्यों में गिने जाते हैं। फिल्म का मशहूर डायलॉग “डॉक्टर डैंग को थप्पड़ की गूंज…” आज 40 साल बाद भी सिनेमा प्रेमियों की जुबान पर चढ़ा हुआ है। इस एक रोल ने साबित कर दिया कि अनुपम खेर न केवल संजीदा रोल कर सकते हैं, बल्कि बड़े पर्दे पर खलनायकी का ऐसा जादू चला सकते हैं जो पूरी फिल्म को खींचने का दम रखता है।

दिलीप कुमार और मल्टी-स्टारर कास्ट के साथ काम करने का अनुभव

‘कर्मा’ केवल एक व्यक्ति की फिल्म नहीं थी, बल्कि इसमें भारतीय सिनेमा के दिग्गजों की फौज शामिल थी। दिलीप कुमार, नूतन, अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ, नसीरुद्दीन शाह और श्रीदेवी जैसे सुपरस्टार्स के बीच अपनी अलग पहचान बनाना किसी भी एक्टर के लिए आसान नहीं था।

Anupam Kher Karma 40 years के माइलस्टोन पर चर्चा करते हुए अनुपम खेर ने बताया कि इतने बड़े सितारों के बीच ‘डॉक्टर डैंग’ का किरदार उभरकर सामने आया, यह उनके लिए किसी सपने जैसा था। महान अभिनेता दिलीप कुमार के सामने अभिनय करना उनके लिए एक यूनिवर्सिटी में पढ़ने जैसा अनुभव था। उन्होंने स्वीकार किया कि दिलीप साहब के साथ काम करके उन्होंने अभिनय की कई बारिकियों को समझा, जिसने उनके आगे के करियर को संवारने में बड़ी भूमिका निभाई।

Anupam Kher Karma 40 Years: सुभाष घई के विजन और निर्देशन का जादू

शोमैन सुभाष घई को भारतीय सिनेमा में बड़े पैमाने पर फिल्में बनाने के लिए जाना जाता है। Anupam Kher Karma 40 years के इस मौके पर अनुपम खेर ने निर्देशक सुभाष घई का दिल से शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि सुभाष घई ही वो इंसान थे जिन्होंने उनके अंदर के कमर्शियल स्टार को पहचाना और उन्हें ‘डॉक्टर डैंग’ जैसा निगेटिव लेकिन पावरफुल रोल सौंपा।

सुभाष घई के निर्देशन की खास बात यह थी कि वे हर किरदार को पर्दे पर बहुत ही भव्य तरीके से पेश करते थे। ‘कर्मा’ का बैकग्राउंड म्यूजिक, सेट्स और अनुपम खेर का लुक सब कुछ इतना अलग था कि इसने दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

Anupam Kher Karma 40 Years: आज के दौर के सिनेमा के लिए क्या हैं सीख?

आज के आधुनिक सिनेमा और ओटीटी के दौर में भी ‘कर्मा’ जैसी फिल्में प्रासंगिक बनी हुई हैं। Anupam Kher Karma 40 years की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बॉलीवुड के नए दौर के फिल्ममेकर्स और एक्टर्स भी अनुपम खेर के इस किरदार की तारीफ करते नहीं थकते।

  • मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस: ‘डॉक्टर डैंग’ का किरदार सिखाता है कि अगर आपका अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस मजबूत है, तो विलेन का रोल भी हीरो जितना ही लोकप्रिय हो सकता है।
  • वर्सटिलिटी (बहुमुखी प्रतिभा): ‘सारांश’ के सीधे-साधे बुजुर्ग से लेकर ‘कर्मा’ के क्रूर आतंकवादी डॉक्टर डैंग तक, अनुपम खेर ने साबित किया कि एक सच्चा कलाकार किसी भी सांचे में ढल सकता है।
  • अमर डायलॉग डिलीवरी: संवादों को किस तरह से पेश किया जाए कि वे दशकों तक याद रहें, यह कर्मा फिल्म से सीखा जा सकता है।

Anupam Kher Karma 40 Years: ‘डॉक्टर डैंग’ को Filmy Galaxy की भावभीनी श्रद्धांजलि

चार दशकों का यह लंबा सफर इस बात का गवाह है कि Anupam Kher Karma 40 years का प्रभाव आज भी दर्शकों के दिलों-दिमाग पर कायम है। ‘डॉक्टर डैंग’ सिर्फ एक फिल्मी किरदार नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

अनुपम खेर ने अपने 40 साल से भी लंबे करियर में 500 से अधिक फिल्मों में काम किया है, लेकिन ‘कर्मा’ का स्थान उनके दिल में हमेशा खास रहेगा। Filmy Galaxy की पूरी टीम अनुपम खेर को उनके इस शानदार और ऐतिहासिक 40 साल के सफर पर ढेर सारी बधाइयां देती है और उम्मीद करती है कि वे आने वाले सालों में भी दर्शकों का ऐसे ही मनोरंजन करते रहेंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here