बॉलीवुड के रेट्रो दौर का सबसे चर्चित और विवादित किस्सा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। 1969 की फिल्म ‘अनजाना सफर’ के सेट पर शूट हुआ Biswajit Rekha Kissing Scene आज भी जब-तब सिनेमाई गलियारों में चर्चा का विषय बन जाता है। करीब 55 साल पुराने इस वाकये पर अब खुद दिग्गज अभिनेता विश्वजीत चटर्जी (Biswajit Chatterjee) ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और एक ऐसा बयान दिया है जिसने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। विश्वजीत ने सीधे तौर पर रणबीर कपूर स्टारर फिल्म ‘एनिमल’ के इंटीमेट सीन्स का हवाला देते हुए कहा कि आज के दौर में उस पुराने विवाद का कोई वजूद ही नहीं बचा है। आइए जानते हैं कि इस पूरे मामले पर अभिनेता ने क्या सफाई दी और असल में उस दौर में क्या हुआ था।

Biswajit Rekha Kissing Scene पर विश्वजीत चटर्जी का बड़ा बयान: ‘एनिमल’ से की तुलना

हाल ही में समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) को दिए एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में जब अभिनेता से इस पुराने प्रसंग के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज करते हुए आज के सिनेमा से इसकी तुलना कर दी। Biswajit Rekha Kissing Scene पर अपनी राय रखते हुए 88 वर्षीय अभिनेता ने कहा कि आज के आधुनिक दौर में उस 5 मिनट के सीन की चर्चा करना पूरी तरह बेमतलब है।

विश्वजीत ने कहा, “आज के दौर में इस विवाद का कोई अर्थ नहीं रह गया है। आज स्क्रीन पर किसिंग सीन होना बेहद सामान्य बात है। मौजूदा फिल्मों में जिस तरह के बेडरूम और इंटीमेट सीन्स दिखाए जाते हैं, उन्हें देखकर मैं खुद हैरान रह जाता हूँ। जब मैंने हालिया फिल्म ‘एनिमल’ (Animal) देखी, तो मुझे ताज्जुब हुआ कि सिनेमा कितना बदल चुका है। उस लिहाज से हमारे उस सीन में ऐसा कुछ भी नहीं था जिसे इतना तूल दिया जाए।” अभिनेता का मानना है कि लोगों के पास जब कोई मुद्दा नहीं होता, तो वे सिर्फ ‘टाइमपास’ के लिए पुरानी बातों को कुरेदते हैं।

1969 का वह अनजाना सफर: Biswajit Rekha Kissing Scene की असली कहानी क्या थी?

सिनेमा के इतिहास के पन्नों को पलटें तो यह पूरा वाकया साल 1969 का है, जब निर्देशक राजा नवाथे फिल्म ‘अनजाना सफर’ की शूटिंग कर रहे थे। उस समय रेखा की उम्र महज 14-15 साल थी और यह उनकी शुरुआती हिंदी फिल्मों में से एक थी। Biswajit Rekha Kissing Scene को महबूब स्टूडियो में शूट किया जाना था।

यासिर उस्मान द्वारा लिखी गई रेखा की बायोग्राफी ‘Rekha: The Untold Story’ के अनुसार, जैसे ही निर्देशक ने ‘एक्शन’ बोला, विश्वजीत ने रेखा को अपनी बाहों में लिया और किस करना शुरू कर दिया। दावा किया जाता है कि रेखा को इस सीन के बारे में पहले से कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। कैमरा लगातार रोल होता रहा और करीब 5 मिनट तक यह सीन चलता रहा। क्रू मेंबर्स सीटियां बजा रहे थे, जबकि रेखा की आंखों में आंसू आ गए थे और वह पूरी तरह असहज महसूस कर रही थीं। सालों तक इस घटना को लेकर विश्वजीत चटर्जी पर बिना सहमति के एक्ट करने के गंभीर आरोप लगते रहे।

Biswajit Rekha Kissing Scene पर अभिनेता का पक्ष: ‘यह सिर्फ डायरेक्टर का विजन था’

सालों से लग रहे आरोपों पर विश्वजीत चटर्जी हमेशा से अपना बचाव करते आए हैं। उनका कहना है कि Biswajit Rekha Kissing Scene में उनकी कोई व्यक्तिगत मंशा नहीं थी, बल्कि वह केवल निर्देशक के आदेशों का पालन कर रहे थे।

विश्वजीत के अनुसार:

  1. डायरेक्टर की योजना: निर्देशक राजा नवाथे सीन में एक नेचुरल शॉक और वास्तविक एक्सप्रेशन चाहते थे, इसलिए उन्होंने रेखा को पहले से सीन की पूरी डिटेल नहीं बताई थी।
  2. पेशेवर रवैया: अभिनेता का कहना है कि उन्होंने एक पेशेवर कलाकार के तौर पर शॉट दिया था, न कि किसी निजी फायदे या आनंद के लिए।
  3. सेंसरशिप का पचड़ा: उस दौर में भारतीय सेंसर बोर्ड बेहद सख्त था। यही कारण रहा कि यह किसिंग सीन विवादों में घिर गया और फिल्म करीब एक दशक तक अटकी रही। बाद में यह फिल्म 1979 में ‘दो शिकारी’ के नाम से रिलीज हो सकी।
  4. लाइफ मैगजीन में छपी तस्वीर: इस विवाद की गूंज सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई दी थी। अमेरिकी पत्रिका ‘लाइफ’ (Life Magazine) ने इस किसिंग सीन की तस्वीर को अपने मुख्य कवर और पन्नों पर जगह दी थी, जिसके नीचे ‘द किसिंग क्राइसिस इन इंडिया’ का शीर्षक दिया गया था।

विवाद के बाद रेखा और विश्वजीत के रिश्ते: क्या वाकई आई थी कोई दरार?

आमतौर पर ऐसी कंट्रोवर्सी के बाद कलाकारों के बीच दूरियां आ जाती हैं, लेकिन विश्वजीत चटर्जी का दावा कुछ अलग ही तस्वीर पेश करता है। उन्होंने इंटरव्यू में जोर देकर कहा कि Biswajit Rekha Kissing Scene के बावजूद उनके और रेखा के निजी या पेशेवर रिश्तों में कभी कोई कड़वाहट नहीं आई।

अभिनेता ने याद दिलाया कि इस घटना के कुछ सालों बाद ही जब उन्होंने बतौर निर्माता और निर्देशक अपनी फिल्म ‘कहते हैं मुझको राजा’ (1976) बनाई, तो रेखा ने खुशी-खुशी उसमें मुख्य अभिनेत्री का किरदार निभाया। विश्वजीत का तर्क है कि यदि रेखा के मन में उनके प्रति कोई नाराजगी या अविश्वास होता, तो वह कभी भी उनके बैनर तले बनने वाली फिल्म में धर्मेंद्र और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे बड़े सितारों के साथ काम करने के लिए राजी नहीं होतीं। रेखा ने हमेशा सेट पर उनके साथ गर्मजोशी और सम्मानजनक व्यवहार बनाए रखा।

आज के दौर में क्यों प्रासंगिक है यह विवाद?

जब भी भारतीय सिनेमा में अभिनेत्रियों की सहमति (Consent on Screen) और सेंसरशिप के इतिहास पर बात होती है, तो Biswajit Rekha Kissing Scene का उदाहरण सबसे पहले सामने आता है। आज के ओटीटी और आधुनिक सिनेमा के दौर में ‘एनिमल’ या अन्य बोल्ड फिल्मों में दिखाए जाने वाले इंटीमेट सीन्स के लिए बकायदा ‘इंटीमेसी को-ऑर्डिनेटर’ की मदद ली जाती है, ताकि कोई भी कलाकार असहज महसूस न करे।

हालांकि 60 और 70 के दशक में ऐसा कोई सुरक्षा घेरा अभिनेत्रियों के पास नहीं था। यही वजह है कि आज की पीढ़ी जब इस घटना को देखती है, तो इसे केवल एक बोल्ड सीन नहीं बल्कि एक युवा नवोदित अभिनेत्री की संवेदनशीलता के उल्लंघन के रूप में देखती है। विश्वजीत चटर्जी भले ही इसे आधुनिक सिनेमा के बोल्ड कंटेंट के सामने हल्का मानते हों, लेकिन सिनेमाई विश्लेषकों का मानना है कि सहमति का सवाल किसी भी दौर में उतना ही महत्वपूर्ण था जितना आज है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, Biswajit Rekha Kissing Scene पर विश्वजीत चटर्जी के हालिया इंटरव्यू ने एक बार फिर पुराने दौर के सिनेमाई तौर-तरीकों और आधुनिक फिल्म मेकिंग के अंतर को सामने ला दिया है। अभिनेता के मुताबिक आज के सिनेमा में ‘एनिमल’ जैसी फिल्मों में दिखाए जाने वाले बोल्ड बेडरूम दृश्यों के आगे उनका वह 55 साल पुराना किसिंग सीन कुछ भी नहीं है।

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