बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री से इस वक्त की सबसे चौंकाने वाली कानूनी खबर सामने आई है। मशहूर कॉमेडी फिल्म ‘धमाल’ के डायरेक्टर इंद्र कुमार और प्रोड्यूसर अशोक ठकेरिया कानूनी मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और पुलिस रिकॉर्ड्स के अनुसार, यह हाई-प्रोफाइल Dhamaal Makers Fraud Case फिल्म के वर्ल्डवाइड राइट्स, डिजिटल अधिकार और नेगेटिव राइट्स बेचने के नाम पर हुए कथित 1.50 करोड़ रुपये के वित्तीय विवाद से जुड़ा हुआ है। मुंबई की अंबोली पुलिस ने इस मामले में औपचारिक रूप से प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।

बॉलीवुड में फिल्मों के डिजिटल, सैटेलाइट और डिस्ट्रीब्यूशन राइट्स को लेकर विवाद अक्सर देखे जाते हैं, लेकिन जब ‘दिल’, ‘बेटा’ और ‘धमाल’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने वाले जाने-माने फिल्ममेकर्स पर धोखाधड़ी का आरोप लगता है, तो पूरी इंडस्ट्री का ध्यान उस ओर खिंच जाता है। यह मामला एक डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी की लिखित शिकायत के बाद दर्ज हुआ है। आइए इस पूरे विवाद की हर एक परत, कानूनी धाराओं और दोनों पक्षों के दावों को विस्तार से समझते हैं।

1. Dhamaal Makers Fraud Case: क्या है ₹1.50 करोड़ के विवाद का पूरा मामला?

इस पूरे कानूनी विवाद की जड़ें साल 2019 के एक व्यावसायिक समझौते (Commercial Agreement) से जुड़ी हुई हैं। मुंबई के अंधेरी वेस्ट स्थित फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ‘ग्रैंड मास्टर’ के मालिक 53 वर्षीय विकास बलदेवराज साहनी ने पुलिस में अपनी शिकायत दर्ज कराई है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, 15 अक्टूबर 2019 को उनकी कंपनी और मारुति इंटरनेशनल (इंद्र कुमार और अशोक ठकेरिया की प्रोडक्शन कंपनी) के बीच एक औपचारिक एग्रीमेंट साइन हुआ था। इस एग्रीमेंट के तहत 2007 में रिलीज हुई संजय दत्त, अरशद वारसी, रितेश देशमुख, जावेद जाफरी और आशीष चौधरी स्टारर कल्ट क्लासिक फिल्म ‘धमाल’ के सभी वर्ल्डवाइड डिस्ट्रीब्यूशन, डिजिटल, नेगेटिव और कॉपीराइट्स ‘ग्रैंड मास्टर’ को 1.50 करोड़ रुपये की तय राशि में स्थायी तौर पर बेच दिए गए थे।

शिकायत में साफ तौर पर कहा गया है कि डील फाइनल करते वक्त निर्माताओं ने यह लिखित और मौखिक भरोसा दिलाया था कि फिल्म के अधिकार किसी भी तीसरे पक्ष (Third Party) को नहीं बेचे गए हैं। डिस्ट्रीब्यूटर का कहना है कि उन्होंने एग्रीमेंट की शर्तों के मुताबिक पूरी रकम का भुगतान भी कर दिया था। हालांकि, बाद में जो सच सामने आया, उसने इस पूरे विवाद को जन्म दिया और आखिरकार यह मामला Dhamaal Makers Fraud Case के रूप में पुलिस थाने तक पहुंच गया।

2. पुराने एग्रीमेंट्स और राइट्स विवाद: आखिर कहां हुई गड़बड़ी?

शिकायतकर्ता विकास साहनी का दावा है कि डील साइन होने के कुछ महीनों बाद उन्हें पता चला कि फिल्म के लाइफटाइम ओटीटी (OTT) और डिजिटल अधिकार मारुति इंटरनेशनल द्वारा साल 2015 में ही ‘शेमारू एंटरटेनमेंट’ (Shemaroo Entertainment) को बेचे जा चुके थे।

शिकायत में लगाए गए मुख्य आरोप इस प्रकार हैं:

  • जनवरी 2020 का खुलासा: शिकायत के अनुसार, जनवरी 2020 में निर्माता अशोक ठकेरिया कथित तौर पर डिस्ट्रीब्यूटर के ऑफिस पहुंचे और उन्होंने अनौपचारिक रूप से बताया कि फिल्म के राइट्स पहले से ही शेमारू के पास हैं।
  • सप्लीमेंट्री एग्रीमेंट का विवाद: शिकायतकर्ता का आरोप है कि 29 अक्टूबर 2020 को मारुति इंटरनेशनल और शेमारू के बीच एक सप्लीमेंट्री एग्रीमेंट हुआ, जिसमें मेकर्स के पास केवल एक सैटेलाइट चैनल के अधिकार शेष रहने की बात कही गई थी।
  • तथ्यों को छिपाने का आरोप: डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी का कहना है कि अगर 2015 में ही राइट्स शेमारू को दिए जा चुके थे, तो 2019 में 1.50 करोड़ रुपये लेकर वही राइट्स दोबारा किसी अन्य पार्टी को कैसे बेचे जा सकते हैं?

इसी तथ्य को आधार बनाते हुए डिस्ट्रीब्यूटर ने आरोप लगाया है कि उनके साथ जानबूझकर धोखाधड़ी की गई और महत्वपूर्ण व्यावसायिक तथ्यों को छुपाया गया।

3. Dhamaal Makers Fraud Case में पुलिस FIR और कानूनी धाराएं

शिकायतकर्ता द्वारा मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के बाद, 17 अगस्त को मुंबई की अंबोली पुलिस ने मामले में संज्ञान लिया। पुलिस ने डायरेक्टर इंद्र कुमार और प्रोड्यूसर अशोक नवलकुमार ठकेरिया के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत केस दर्ज किया।

इस मामले में मुख्य रूप से दो धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ है:

  1. धारा 318(4) (BNS): यह धारा धोखाधड़ी (Cheating) और बेईमानी से संपत्ति सौंपने के लिए प्रेरित करने से संबंधित है (जो पूर्व में आईपीसी की धारा 420 के समान है)।
  2. धारा 3(5) (BNS): यह धारा समान इरादे (Common Intention) से मिलकर किए गए अपराधों पर लागू होती है (पूर्व में आईपीसी की धारा 34)।

कानूनी जानकारों के अनुसार, कॉपीराइट और डिस्ट्रीब्यूशन विवादों में आमतौर पर सिविल कोर्ट में सुनवाई होती है, लेकिन जब पहली नजर में तथ्यों को जानबूझकर छिपाने या एक ही अधिकार को दो अलग-अलग पार्टियों को बेचने का आरोप साबित होता है, तो मामला आपराधिक धोखाधड़ी (Criminal Breach of Trust and Cheating) का रूप ले लेता है। पुलिस ने दोनों पक्षों के सभी एग्रीमेंट्स, बैंक ट्रांसफर स्टेटमेंट्स और ईमेल कम्यूनिकेशन को जब्त कर तकनीकी जांच शुरू कर दी है।

4. कॉपीराइट ऑफिस से मिला सरकारी सर्टिफिकेट और ओरिजिनल नेगेटिव

शिकायतकर्ता विकास साहनी का कहना है कि उनकी कंपनी ने नियमानुसार सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया था।

  • 20 मार्च 2020 को ‘ग्रैंड मास्टर’ ने फिल्म ‘धमाल’ के सिनेमैटोग्राफ कॉपीराइट के लिए भारत सरकार के कॉपीराइट ऑफिस में विधिवत आवेदन किया था।
  • 28 अप्रैल 2023 को कॉपीराइट ऑफिस ने उनकी कंपनी के पक्ष में CF-5230/2023 नंबर का आधिकारिक सर्टिफिकेट भी जारी किया।
  • डिस्ट्रीब्यूटर का दावा है कि फिल्म का ओरिजिनल नेगेटिव (Original Negative) और कंप्लीट ‘चेन ऑफ टाइटल’ (Chain of Title) दस्तावेज वर्तमान में उनके पास सुरक्षित हैं।

शिकायतकर्ता ने पुलिस को अपनी ओनरशिप साबित करने के लिए कॉपीराइट सर्टिफिकेट, ओरिजिनल लैब लेटर्स और बैंक ट्रांजैक्शन की रसीदें सौंपी हैं। उनका तर्क है कि जब उनके पास वैध सरकारी कॉपीराइट है, तो फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अधिकार को लेकर जो असमंजस पैदा हुआ, उसकी सीधी जिम्मेदारी मारुति इंटरनेशनल के प्रमोटर्स की है।

5. डिस्ट्रीब्यूटर का करोड़ों के वित्तीय नुकसान का दावा

इस विवाद के कारण फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी को न सिर्फ 1.50 करोड़ रुपये के निवेश का झटका लगा, बल्कि भविष्य के कई बड़े बिजनेस डील्स भी रद्द हो गए।

विकास साहनी का आरोप है कि ‘धमाल’ जैसी सुपरहिट और एवरग्रीन कॉमेडी फिल्म की ओटीटी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जबरदस्त मांग थी। उन्होंने कई प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और ब्रॉडकास्टर्स के साथ लाखों-करोड़ों की डील्स फाइनल करने की बातचीत शुरू की थी। लेकिन जब प्लेटफॉर्म्स को पता चला कि फिल्म के डिजिटल राइट्स को लेकर शेमारू और मारुति इंटरनेशनल का पुराना क्लैश मौजूद है और टाइटल पूरी तरह क्लियर नहीं है, तो सभी बड़ी कंपनियों ने अपने हाथ पीछे खींच लिए।

इस वजह से डिस्ट्रीब्यूटर को बाजार में भारी वित्तीय घाटा और अपनी व्यावसायिक साख (Reputation) का नुकसान उठाना पड़ा। यही कारण रहा कि दोनों पक्षों के बीच सुलह के प्रयास असफल होने के बाद मामला कोर्ट और पुलिस तक पहुंचा।

6. Dhamaal Makers Fraud Case: मध्यस्थता की विफलता और आगे की राह

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस में औपचारिक FIR दर्ज कराने से पहले दोनों पक्षों के बीच इस विवाद को आपसी बातचीत और मध्यस्थता (Mediation) के जरिए सुलझाने का प्रयास किया गया था। एक रिटायर्ड जज की मध्यस्थता में कई दौर की बैठकें हुईं ताकि अधिकारों के बंटवारे या वित्तीय रिफंड को लेकर कोई सम्मानजनक हल निकाला जा सके।

हालांकि, दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। डिस्ट्रीब्यूटर पक्ष अपने पूरे नुकसान की भरपाई और अधिकारों की स्पष्टता पर अड़ा रहा, जबकि दूसरी तरफ से कोई ठोस समाधान नहीं निकला। मध्यस्थता प्रक्रिया के विफल होने के बाद डिस्ट्रीब्यूटर ने आपराधिक शिकायत दर्ज कराने का फैसला लिया।

इस पूरे घटनाक्रम पर फिलहाल इंद्र कुमार और अशोक ठकेरिया की लीगल टीम द्वारा औपचारिक विस्तृत जवाब तैयार किया जा रहा है। फिल्म इंडस्ट्री के सूत्रों का कहना है कि मेकर्स इसे कॉन्ट्रैक्ट के गलत अर्थ निकालने और सिविल डिस्प्यूट का मामला बताते हुए अग्रिम राहत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

7. ‘धमाल’ फ्रेंचाइजी का बॉक्स ऑफिस पर स्वर्णिम सफर

धमाल बॉलीवुड की सबसे सफल और लोकप्रिय कॉमेडी फ्रेंचाइजी में से एक मानी जाती है:

  • धमाल (2007): 7 सितंबर 2007 को रिलीज हुई इस फिल्म ने दर्शकों को लोटपोट कर दिया था। आदि, मानव, रॉय और बोमन के किरदारों ने कल्ट स्टेटस हासिल किया।
  • डबल धमाल (2011): पहली फिल्म की सफलता के बाद 24 जून 2011 को सीक्वल रिलीज हुआ, जिसने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कारोबार किया।
  • टोटल धमाल (2019): 22 फरवरी 2019 को अजय देवगन, अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित के साथ आई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 200 करोड़ से अधिक का ग्रॉस कलेक्शन किया।
  • धमाल 4: हाल ही में रिलीज हुई ‘धमाल 4’ ने भी सिनेमाघरों में वर्ल्डवाइड करीब ₹229.91 करोड़ का शानदार ग्रॉस कलेक्शन दर्ज किया है।

इतनी बड़ी और मुनाफे वाली फ्रेंचाइजी के पहले पार्ट को लेकर जब इस तरह का विवाद सामने आता है, तो यह इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा झटका साबित होता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

फिल्म इंडस्ट्री में बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) और डिजिटल राइट्स की वैल्यू आज के दौर में आसमान छू रही है। ऐसे में Dhamaal Makers Fraud Case बॉलीवुड के कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट और राइट्स ट्रांसफर सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

अब देखना यह होगा कि मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा और जांच अधिकारी दस्तावेजों की पड़ताल के बाद क्या कदम उठाते हैं। क्या दोनों पक्ष कोर्ट के बाहर किसी समझौते पर पहुंचेंगे या फिर यह मामला अदालत की लंबी कानूनी लड़ाई में तब्दील होगा? मनोरंजन जगत से जुड़ी ऐसी ही तमाम सटीक और विश्वसनीय खबरों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।

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