बॉलीवुड के ‘हीरो नंबर वन’ गोविंदा ने अपने अभिनय, डांस और कॉमिक टाइमिंग से करोड़ों दिलों पर राज किया है। पर्दे पर हमेशा दर्शकों को हंसाने और थिरकाने वाले गोविंदा का निजी जीवन अत्यंत संघर्षों, त्याग और आंसुओं से भरा रहा है। हाल ही में एक भावुक साक्षात्कार में Govinda Recalls Mother Struggle को लेकर बात करते हुए अभिनेता ने अपनी मां निर्मला देवी के जीवन के उन अनदेखे पहलुओं को उजागर किया, जिसे सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। 40 के दशक की मशहूर हीरोइन और शास्त्रीय गायिका होने के बावजूद निर्मला देवी ने क्यों अपना सिर मुंडवा लिया और ग्लैमर की दुनिया छोड़कर साध्वी का जीवन अपना लिया, इसकी दर्दनाक दास्तान गोविंदा ने साझा की है।

Govinda Recalls Mother Struggle: बांद्रा के आलीशान बंगले से विरार की तंग चॉल तक का सफर

गोविंदा का जन्म किसी तंगहाली वाले परिवार में नहीं हुआ था। उनके पिता अरुण कुमार आहूजा 1940 के दशक के जाने-माने अभिनेता थे और उनकी मां निर्मला देवी महबूब खान की फिल्मों में बतौर लीड एक्ट्रेस काम कर चुकी थीं। परिवार मुंबई के बांद्रा स्थित कार्टर रोड पर एक बेहद आलीशान बंगले में रहता था, जहां उस दौर की तमाम सुख-सुविधाएं मौजूद थीं।

लेकिन किस्मत ने अचानक ऐसा पलटा खाया कि पूरा परिवार सड़क पर आ गया। गोविंदा के पिता ने एक फिल्म का निर्माण किया, जिसमें उन्होंने अपनी सारी जमा-पूंजी लगा दी। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई और परिवार भारी कर्ज में डूब गया। कर्ज चुकाने के लिए बांद्रा का बंगला, गाड़ियां और गहने सब बिक गए।

रातों-रात पूरा परिवार बांद्रा की पॉश कॉलोनी से निकलकर मुंबई के दूरदराज इलाके विरार की एक छोटी सी चॉल में रहने को मजबूर हो गया। जब Govinda Recalls Mother Struggle की बात आती है, तो अभिनेता बताते हैं कि कैसे उनकी मां ने बिना किसी शिकायत के इस कंगाली को गले लगाया और छह बच्चों की परवरिश का जिम्मा अकेले अपने कंधों पर उठा लिया।

ग्लैमर की दुनिया की मलिका से संन्यास की राह

निर्मला देवी केवल एक अभिनेत्री ही नहीं थीं, बल्कि बनारस घराने की एक प्रतिष्ठित शास्त्रीय गायिका भी थीं। फिल्म इंडस्ट्री में उनका एक बड़ा रसूख था। जब पिता का स्वास्थ्य खराब हुआ और वे काम करने की स्थिति में नहीं रहे, तब निर्मला देवी ने अपनी कला और रियाज को ही परिवार का संबल बनाया।

वे दूरदर्शन, ऑल इंडिया रेडियो और संगीत सम्मेलनों में गाकर जो थोड़े-बहुत पैसे मिलते, उससे घर का चूल्हा जलाती थीं। इस कठिन दौर में समाज और रिश्तेदारों ने भी उनसे मुंह मोड़ लिया था। जिन लोगों का उनके बांद्रा वाले बंगले पर तांता लगा रहता था, वे विरार की चॉल में उनका हाल पूछने तक नहीं आए।

इन परिस्थितियों को याद करते हुए Govinda Recalls Mother Struggle के दौरान उन्होंने कहा कि कैसे उनकी मां ने कभी किसी रिश्तेदार या फिल्म जगत के बड़े लोगों के आगे हाथ नहीं फैलाया। उन्होंने अपने स्वाभिमान को कभी गिरने नहीं दिया और अपने बच्चों को हमेशा मेहनत और ईमानदारी का पाठ पढ़ाया।

Govinda Recalls Mother Struggle: मां ने क्यों मुंडवाया सिर और धारण किया गेरुआ वस्त्र?

गोविंदा ने बताया कि जब परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा, तो उनकी मां ने भौतिक दुनिया और सांसारिक मोह-माया से पूरी तरह दूरी बना ली। उन्होंने एक दिन अचानक यह फैसला किया कि वे अब संन्यास का जीवन जिएंगी।

निर्मला देवी ने अपना सिर मुंडवा लिया, सारे आभूषण त्याग दिए और गेरुआ वस्त्र धारण कर पूर्णतः साध्वी बन गईं। गोविंदा के शब्दों में:

“मां ने कहा कि जब भगवान ने सब कुछ छीन लिया है, तो अब मुझे इस सांसारिक दिखावे और खूबसूरती की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने अपने बाल कटवाकर खुद को पूरी तरह ईश्वर की भक्ति और बच्चों की सुरक्षा के लिए समर्पित कर दिया। वह सुबह 3 बजे उठकर घंटों पूजा और रियाज करती थीं।”

जब भी Govinda Recalls Mother Struggle का जिक्र होता है, अभिनेता की आवाज भारी हो जाती है। वे बताते हैं कि मां का सिर मुंडवाना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं थी, बल्कि यह उस क्रूर समाज और तंगहाली के खिलाफ एक मूक विद्रोह था, जिसने एक खूबसूरत हीरोइन को इस हाल में पहुंचा दिया था।

चॉल में बीता बचपन और राशन की लाइनों की कड़वी हकीकत

गोविंदा अक्सर बताते हैं कि विरार के उस छोटे से कमरे में बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता था। कई रातें ऐसी भी बीतीं जब घर में खाने के लिए पर्याप्त अनाज नहीं होता था और मां बच्चों को पानी पिलाकर सुला देती थीं।

गोविंदा को राशन की दुकानों पर घंटों लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था। कई बार राशन डीलर पैसे न होने या उधारी के कारण उन्हें दुत्कार कर भगा देता था। गोविंदा जब अपमानित होकर रोते हुए घर लौटते, तो उनकी मां उन्हें गले लगाकर कहती थीं कि यह समय भी बीत जाएगा और एक दिन उनका बेटा सबका नाम रोशन करेगा।

इन मार्मिक पलों को बयां करते हुए Govinda Recalls Mother Struggle के तहत अभिनेता ने कहा कि मां की आंखों के आंसुओं ने ही उनके भीतर एक जिद पैदा की। उन्होंने कसम खाई थी कि वे दिन-रात एक करके इतनी दौलत और शोहरत कमाएंगे कि अपनी मां को फिर से वही रानी जैसा जीवन दे सकें जो उनसे छिन गया था।

Govinda Recalls Mother Struggle: 80 के दशक में गोविंदा की बेजोड़ सफलता और मां का आशीर्वाद

1986 में फिल्म ‘इल्जाम’ से जब गोविंदा ने बॉलीवुड में कदम रखा, तो उन्होंने इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया। उनके डांस और अभिनय के लोग दीवाने हो गए। एक वक्त ऐसा आया जब गोविंदा ने एक साथ दर्जनों फिल्में साइन कीं और वे बैक-टू-बैक शिफ्ट्स में काम करने लगे।

सफलता की बुलंदियों पर पहुंचने के बाद गोविंदा ने सबसे पहले अपनी मां के लिए मुंबई में एक शानदार घर खरीदा। वे जब भी अपनी कमाई का पहला चेक लाते, तो उसे अपनी मां के चरणों में रख देते थे।

गोविंदा का मानना है कि वे आज जिस मुकाम पर हैं, उसमें उनकी अपनी कोई काबिलियत नहीं है। जब Govinda Recalls Mother Struggle की बात सामने आती है, तो वे हमेशा कहते हैं कि यह सब केवल उनकी मां की कठिन तपस्या, अनगिनत रातों के आंसुओं और ईश्वर से मांगी गई मन्नतों का फल है।

मां निर्मला देवी का आध्यात्मिक प्रभाव और गोविंदा के जीवन मूल्य

निर्मला देवी के साध्वी रूप ने गोविंदा के व्यक्तित्व को भी गहराई से प्रभावित किया। बॉलीवुड के सबसे चकाचौंध भरे माहौल में रहने के बावजूद गोविंदा हमेशा जमीन से जुड़े रहे और अपनी मां के प्रति उनकी निष्ठा एक मिसाल बनी रही।

गोविंदा नियमित रूप से अपनी मां के पैर धोकर उसका जल पीते थे। फिल्म सेट पर जाने से पहले वे हमेशा अपनी मां का चरण स्पर्श करते थे, चाहे वे कितनी भी जल्दी में क्यों न हों।

इंटरव्यू के दौरान जब Govinda Recalls Mother Struggle की चर्चा छिड़ी, तो अभिनेता ने बताया कि मां ने हमेशा सिखाया कि दौलत और शोहरत आनी-जानी चीजें हैं, लेकिन इंसान का चरित्र और माता-पिता के प्रति उसका आदर कभी नहीं बदलना चाहिए। मां की यही सीख गोविंदा के जीवन का मूल मंत्र बन गई।

निर्मला देवी के संघर्ष और त्याग का संक्षिप्त सफरनामा

दौर और परिस्थितिजीवन का स्वरूपमुख्य घटनाएं और त्याग
1940 का दशक (स्वर्ण युग)मशहूर अभिनेत्री व शास्त्रीय गायिकाबांद्रा का आलीशान बंगला, महबूब खान की फिल्मों में मुख्य भूमिका
फिल्म निर्माण में घाटाकंगाली और बेबसी का दौरपिता की फिल्म फ्लॉप, बंगला बिका, विरार की चॉल में विस्थापन
साध्वी बनने का फैसलाभौतिक मोह-माया का पूर्ण त्यागसिर मुंडवाया, गेरुआ वस्त्र धारण किए, सुबह 3 बजे से रियाज व साधना
गोविंदा की सफलता का दौरबेटे की कामयाबी और सम्मान की वापसीगोविंदा सुपरस्टार बने, मां के चरणों में समर्पित की सारी दौलत

इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ झलकता है कि जब Govinda Recalls Mother Struggle पर प्रकाश डालते हैं, तो यह केवल एक परिवार की निजी कहानी नहीं रह जाती, बल्कि यह भारतीय समाज में एक मां के असीम त्याग और संकल्प का प्रतीक बन जाती है।

एक मां के त्याग की अमर दास्तान

निर्मला देवी आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन गोविंदा के दिल में उनकी यादें और उनके आदर्श आज भी पूरी तरह जीवित हैं। गोविंदा जब भी किसी मंच पर होते हैं, तो वे अपनी सफलता का सारा श्रेय अपनी मां को देना नहीं भूलते।

हीरोइन से साध्वी बनने तक का उनका यह सफर यह दर्शाता है कि एक मां अपने बच्चों की सुरक्षा और स्वाभिमान के लिए किस हद तक जा सकती है। आज जब Govinda Recalls Mother Struggle के जरिए दुनिया को यह दर्दनाक दास्तान पता चली है, तो फैंस का गोविंदा और उनकी दिवंगत मां के प्रति सम्मान और भी कई गुना बढ़ गया है।

यह कहानी उन सभी लोगों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो जीवन में कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं। दृढ़ संकल्प, साधना और ईमानदारी से किसी भी अंधेरे को चीरकर सफलता का सूरज उगाया जा सकता है।

फिल्मी गैलेक्सी (Filmy Galaxy) बॉलीवुड सितारों के जीवन से जुड़े ऐसे ही अनकहे पलों, प्रेरणादायक कहानियों और प्रामाणिक खबरों को निष्पक्ष रूप से आप तक पहुंचाने के लिए समर्पित है। सिनेमा जगत की हर बड़ी और सच्ची खबर के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here