सिनेमा जगत में आस्था और अध्यात्म से जुड़ी कहानियाँ दर्शकों के दिलों को गहराई से छूती हैं। हाल के दिनों में फिल्म ‘हनुमान अंश’ बॉक्स ऑफिस पर एक बड़ा प्रभाव छोड़ने में सफल रही है। फिल्म की सफलता के बीच इसके निर्माण से जुड़े कई ऐसे प्रसंग सामने आ रहे हैं जो किसी चमत्कार से कम नहीं लगते। इस बीच Neem Karoli Baba daughter गिरिजा जी (जिन्हें भक्त आदर से ‘अम्मा जी‘ कहते हैं) को लेकर फिल्म की निर्माता रागिनी सोना ने एक बेहद भावुक और हैरान कर देने वाला अनुभव साझा किया है। निर्माता ने बताया कि जब बाबा की सुपुत्री ने यह फिल्म देखी, तो वह अपने आँसू नहीं रोक पाईं।

भारतीय जनमानस में नीम करोली बाबा का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। विश्व भर के दिग्गज उद्योगपतियों से लेकर आम श्रद्धालु तक उनके पावन चरणों में शीश नवाते हैं। ऐसे में उनके जीवन दर्शन और हनुमान भक्ति पर आधारित इस फिल्म को लेकर परिवार की क्या प्रतिक्रिया रही, यह जानना हर किसी के लिए कौतूहल का विषय था। निर्माता रागिनी सोना और निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की मुलाकात जब बाबा के परिवार से हुई, तो कई ऐसे अनुभव हुए जिन्होंने पूरी टीम को निशब्द कर दिया।

Neem Karoli Baba Daughter: जब पहली मुलाकात में ही सामने आया अद्भुत अनुभव

फिल्म के प्रदर्शन से पूर्व पूरी टीम का यह दृढ़ संकल्प था कि वे इस कार्य को आगे बढ़ाने से पहले परिवार का आशीर्वाद लें। निर्माता रागिनी सोना ने बताया कि निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के साथ उन्होंने Neem Karoli Baba daughter से संपर्क करने का निरंतर प्रयास किया। कठिन प्रयासों के उपरांत जब उनका संपर्क नंबर प्राप्त हुआ, तो फोन पर एक संक्षिप्त वार्ता हुई।

रागिनी सोना के अनुसार, बातचीत के दौरान जब अम्मा जी से फिल्म देखने का अनुरोध किया गया, तो उन्होंने सहजता से कहा कि वे सही समय आने पर अवश्य इसे देखेंगी। इसी संवाद के दौरान एक ऐसी घटना घटी जिसने सभी को स्तब्ध कर दिया। अम्मा जी ने रागिनी से पूछा कि उन्हें इस विषय पर फिल्म बनाने की प्रेरणा कहाँ से मिली। रागिनी ने बताया कि जब वे छह वर्ष की थीं, तब उनके पिता नैनीताल में पदस्थापित थे और उसी दौरान उन्हें बाबा के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ था।

यह सुनते ही Neem Karoli Baba daughter ने बिना किसी पूर्व जानकारी के रागिनी के पिता का नाम, उनके बड़े भाई का नाम और आगरा में स्थित उनके लगभग पचास वर्ष पुराने पैतृक आवास का सटीक विवरण दे दिया। रागिनी बताती हैं कि उस समय कॉल पर निर्देशक विशाल भी साक्षी थे। किसी अजनबी के पारिवारिक अतीत की इतनी सूक्ष्म जानकारियाँ बिना बताए जान लेना केवल एक अलौकिक शक्ति के माध्यम से ही संभव हो सकता है।

‘हनुमान अंश’ देखकर क्यों छलक पड़े अम्मा जी के आँसू?

आस्था से ओत-प्रोत इस चलचित्र की यात्रा केवल एक व्यावसायिक परियोजना नहीं थी, बल्कि यह साधना का मार्ग बन गई थी। जब फिल्म बनकर पूरी हुई और इसे बाबा के परिवार के समक्ष प्रस्तुत किया गया, तो वातावरण अत्यंत भावुक हो उठा। Neem Karoli Baba daughter ने फिल्म को एकाधिक बार देखा और प्रत्येक बार उनके नयनों से अविरल अश्रुधारा बह निकली।

फिल्म में नीम करोली बाबा के प्रति हनुमान जी की अनन्य कृपा और लोक कल्याण के उनके संकल्प को बड़ी ही संवेदनशीलता के साथ चित्रित किया गया है। जब किसी संत की अपनी संतान उनके जीवन दर्शन को पर्दे पर इतनी सत्यता के साथ जीवंत होते देखती है, तो स्मृतियों का ज्वार उमड़ना स्वाभाविक है। अम्मा जी का यह अश्रुपूर्ण भाव इस बात का प्रमाण था कि फिल्म के निर्माताओं ने कहानी के साथ पूरा न्याय किया है।

Neem Karoli Baba Daughter: सादगी, सेवा और बाबा की साक्षात प्रतिरूप

निर्माता रागिनी सोना जब व्यक्तिगत रूप से मिलने पहुँचीं, तो वे अम्मा जी के दर्शन पाकर भाव-विभोर हो गईं। रागिनी ने अपने साक्षात्कार में उल्लेख किया कि Neem Karoli Baba daughter को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो वे साक्षात नीम करोली बाबा का ही प्रतिरूप हों। उनके मुखमंडल का तेज, उनकी वाणी की मिठास और उनकी सहज मुस्कान ठीक वैसी ही थी जैसा श्रद्धालु महाराज जी के बारे में वर्णन करते हैं।

अम्मा जी आज भी अपने पूज्य पिता के मूल संदेश ‘सबको प्रेम करो, सबको भोजन कराओ’ (Love all, feed all) को अपने दैनिक जीवन में पूरी निष्ठा से जीती हैं। रागिनी ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनके घर पर जो प्रसाद रूपी भोजन परोसा गया, उसका स्वाद अलौकिक था। वहाँ ऐसा प्रतीत होता था कि परोसे जाने वाले अन्न की मात्रा स्वतः बढ़ती जा रही है। यह वही दिव्य अनुभव था जिसकी अनुभूति कैंची धाम आश्रम में आने वाला हर भक्त करता है।

परिवार की सादगी और अगली पीढ़ी का आशीर्वाद

इस यात्रा के दौरान निर्माण दल ने नीम करोली बाबा के पौत्र धनंजय जी से भी भेंट की। आधुनिक चकाचौंध से कोसों दूर, बाबा का पूरा परिवार अत्यंत सादगी और विनम्रता का जीवन व्यतीत कर रहा है। रागिनी ने कहा कि वे स्वयं को अत्यंत भाग्यशाली मानती हैं कि उन्हें इस पावन परिवार का सानिध्य और मंगल आशीर्वाद प्राप्त हुआ।

धनंजय जी और Neem Karoli Baba daughter दोनों ही बाबा के उस सनातन संदेश को आगे बढ़ा रहे हैं जिसमें किसी प्रकार का आडंबर नहीं है। केवल प्रेम, करुणा और परोपकार ही उनके जीवन का आधार है। निर्माता का मानना है कि इस पूरे चलचित्र का निर्माण किसी मानवीय प्रयास मात्र से संभव नहीं था; इसके पीछे बाबा और उनके परिवार की अदृश्य कृपा शक्ति निरंतर कार्य कर रही थी।

Neem Karoli Baba Daughter: नई पीढ़ी में जागी आस्था की नई चेतना

वर्तमान समय में नीम करोली बाबा के प्रति युवाओं का आकर्षण तेजी से बढ़ा है। रागिनी सोना ने बातचीत के दौरान भारतीय क्रिकेट के दिग्गज विराट कोहली और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब विराट और अनुष्का जैसी वैश्विक हस्तियों ने कैंची धाम जाकर बाबा के चरणों में शीश नवाया, तो आधुनिक पीढ़ी के मन में बाबा के बारे में जानने की जिज्ञासा कई गुना बढ़ गई।

इसी जन-जिज्ञासा को ‘हनुमान अंश’ ने एक सुंदर अभिव्यक्ति दी। जब Neem Karoli Baba daughter ने इस प्रयास को अपना आशीर्वाद दिया, तो यह फिल्म केवल मनोरंजन का साधन न रहकर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन गई। सिनेमाघरों में दर्शकों का उमड़ता जनसैलाब और फिल्म का ऐतिहासिक प्रदर्शन यह सिद्ध करता है कि भारत की सनातन आध्यात्मिक चेतना आज भी जन-जन के हृदय में पूरी प्रखरता से विद्यमान है।

श्रद्धा और सत्य का एक अनूठा संगम

फिल्म निर्माण के दौरान घटे ये विस्मयकारी प्रसंग यह दर्शाते हैं कि जब कोई कार्य विशुद्ध भावना और श्रद्धा से किया जाता है, तो ईश्वर स्वयं उसका मार्ग प्रशस्त करते हैं। Filmy Galaxy की रिपोर्ट के अनुसार, Neem Karoli Baba daughter के साथ हुई यह भेंट और उनके द्वारा प्रकट किया गया स्नेह इस बात की पुष्टि करता है कि सत्य पर आधारित कला कभी व्यर्थ नहीं जाती।

रागिनी सोना और विशाल चतुर्वेदी के लिए यह अनुभव जीवन भर की अमूल्य पूंजी बन चुका है। आज जब दर्शक सिनेमाघरों से भावुक होकर बाहर निकल रहे हैं, तो वे केवल एक कहानी देखकर नहीं लौट रहे, बल्कि वे उस दिव्य ऊर्जा को महसूस कर रहे हैं जिसे Neem Karoli Baba daughter ने अपने आंसुओं और वचनों से प्रमाणित किया था। यह फिल्म आधुनिक सिनेमा के इतिहास में श्रद्धा, निष्ठा और ईश्वरीय अनुग्रह की एक अविस्मरणीय मिसाल के रूप में दर्ज हो चुकी है।

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