भारतीय कला और संगीत जगत में कलाकारों का मान-सम्मान हमेशा सर्वोपरि रहा है। जब किसी सार्वजनिक मंच पर देश के किसी प्रतिष्ठित और वरिष्ठ कलाकार की गरिमा को ठेस पहुंचाई जाती है, तो स्वाभाविक रूप से पूरे कला जगत में आक्रोश की लहर दौड़ जाती है। उत्तराखंड के टिहरी में आयोजित प्रसिद्ध मां कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले के दौरान कुछ ऐसा ही अप्रिय वाकया देखने को मिला, जिसने मनोरंजन और राजनीतिक गलियारों में तूफान खड़ा कर दिया है। पॉप और भांगड़ा सम्राट दलेर मेहंदी के साथ मंच पर हुए दुर्व्यवहार के बाद अब बॉलीवुड के लोकप्रिय हास्य अभिनेता राजपाल यादव खुलकर उनके समर्थन में आ गए हैं। इस Rajpal Yadav Daler Mehndi विवाद ने यह गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सत्ता और पद की धौंस में किसी राष्ट्रीय स्तर के फनकार का सरेआम अपमान किया जा सकता है?
क्या है पूरा मामला और मंच पर क्या हुआ था?
उत्तराखंड के नरेंद्रनगर (टिहरी) में सिद्धपीठ मां कुंजापुरी मेले के सांस्कृतिक कार्यक्रम में मशहूर गायक दलेर मेहंदी को मुख्य आकर्षण के रूप में प्रस्तुति देने के लिए आमंत्रित किया गया था। हजारों की संख्या में दर्शक उन्हें सुनने के लिए मैदान में उमड़े हुए थे। प्रत्यक्षदर्शियों और सामने आए वीडियो फुटेज के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान ही राज्य के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल अचानक मंच पर पहुंच गए।
माइक थामकर उन्होंने सबके सामने दलेर मेहंदी पर बेहद आपत्तिजनक आरोप लगाने शुरू कर दिए। मंत्री ने सार्वजनिक तौर पर यह दावा किया कि गायक नशे की हालत में हैं और ठीक से गा नहीं रहे हैं। उन्होंने तीखे लहजे में कहा, “बोल तो जा नहीं रहा, गाना क्या गाओगे।” इसके बाद मेले का माहौल पूरी तरह बिगड़ गया। मंच पर मौजूद इस तनावपूर्ण स्थिति का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया, जिसके बाद इंटरनेट पर लोगों ने मंत्री के गैर-जिम्मेदाराना रवैये और अभद्र भाषा की तीखी भर्त्सना शुरू कर दी।
दलेर मेहंदी के समर्थन में उतरे राजपाल यादव
जैसे ही यह घटनाक्रम वायरल हुआ, बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी कर खुलकर अपनी नाराजगी दर्ज कराई। राजपाल यादव और दलेर मेहंदी ने आगामी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ (Welcome to the Jungle) में एक साथ काम किया है, जिसके चलते दोनों के बीच एक गहरा सम्मानजनक रिश्ता है।
राजपाल यादव ने अपने वीडियो में बेहद संजीदा लेकिन सख्त लहजे में मंत्री के बर्ताव की निंदा की। उन्होंने कहा कि एक संवैधानिक और प्रशासनिक पद पर बैठे जनप्रतिनिधि को सार्वजनिक मंच से इस तरह की भाषा और आचरण कतई शोभा नहीं देता। राजपाल ने कहा:
“दलेर मेहंदी कोई साधारण नाम नहीं हैं। वे एक वैश्विक पहचान रखने वाले लीजेंडरी कलाकार हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया में भारतीय संगीत का परचम लहराया है। जिस तरह से मंच पर उनके साथ बदसलूकी की गई, वह केवल उनका नहीं, बल्कि संपूर्ण कला और कलाकार समुदाय का घोर अपमान है।”
‘शराब नहीं पीते दलेर पाजी, वे बीमार हैं’: राजपाल का खुलासा
राजपाल यादव ने मंत्री द्वारा लगाए गए नशे के आरोपों की धज्जियां उड़ाते हुए एक बड़ा व्यक्तिगत खुलासा किया। अभिनेता ने स्पष्ट किया कि दलेर मेहंदी शराब को हाथ तक नहीं लगाते।
राजपाल ने भावुक होते हुए बताया कि दलेर मेहंदी पिछले काफी समय से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं और बीमारी से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि खराब स्वास्थ्य के बावजूद दलेर जी केवल जनता के प्यार और वादे के प्रति समर्पण के कारण इतनी दूर पहाड़ पर प्रस्तुति देने पहुंचे थे। अगर उनकी आवाज में कोई कमजोरी या शरीर में थकावट दिख रही थी, तो वह बीमारी का असर था, न कि किसी नशे का। बिना हकीकत जाने किसी वरिष्ठ कलाकार पर शराब पीने का झूठा ठप्पा लगाकर सार्वजनिक रूप से बेइज्जत करना बेहद शर्मनाक और अमानवीय है।
‘कुर्सियां आती-जाती रहती हैं, कला अमर रहती है’: मंत्री को नसीहत
अपने वीडियो संदेश में राजपाल यादव ने सत्ता के अहंकार पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सत्ता, मंत्रालय और राजनीतिक कुर्सियां हमेशा नहीं रहतीं, वे जनता के जनादेश के साथ आती और जाती रहती हैं। लेकिन एक सच्चा फनकार और उसकी कला पीढ़ियों तक अमर रहती है।
राजपाल ने मंत्री को आईना दिखाते हुए कहा, “ऐसा लगा जैसे आपने पैसे देकर कला को ही खरीद लिया हो। याद रखिए, कला और फनकार को पैसे की ताकत से खरीदा नहीं जा सकता। यदि आपने किसी कलाकार को आमंत्रित किया है, तो उसके मान-सम्मान की रक्षा करना आयोजकों और मेजबानों का बुनियादी कर्तव्य होता है, न कि उसे जलील करना।”
कला जगत से उठी एकजुटता की आवाज
राजपाल यादव के इस साहसिक कदम के बाद फिल्म और संगीत उद्योग से कई अन्य हस्तियां भी दलेर मेहंदी के बचाव में उतर आईं। अनुपम खेर, मीका सिंह और रैपर बादशाह जैसी बड़ी हस्तियों ने भी इस घटना पर गहरा क्षोभ प्रकट किया है।
उद्योग जगत का स्पष्ट कहना है कि कलाकार देश का सांस्कृतिक दूत होता है। किसी भी राजनीतिक हस्ती को यह अधिकार नहीं है कि वह अपनी प्रशासनिक हैसियत का दुरुपयोग करके कलाकारों के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाए। लोगों ने मांग की कि जनप्रतिनिधियों को सार्वजनिक मंचों पर गरिमा, विनम्रता और आतिथ्य सत्कार की मर्यादा का पालन करना सीखना चाहिए।
कलाकारों के प्रति मेजबानी और प्रोटोकॉल पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने भारत में लाइव शो और सरकारी या अर्ध-सरकारी उत्सवों में कलाकारों की सुरक्षा और उनके साथ किए जाने वाले व्यवहार की पोल खोल दी है। अक्सर देखा जाता है कि आयोजक भारी भरकम बजट देकर बड़े सितारों को बुला तो लेते हैं, लेकिन मंच पर उनके साथ किसी कर्मचारी या बंधुआ मजदूर जैसा व्यवहार करने की चेष्टा की जाती है।
यदि किसी कलाकार की तबीयत मंच पर बिगड़ जाती है या कोई तकनीकी समस्या आ जाती है, तो आयोजकों की जिम्मेदारी होती है कि वे पर्दे के पीछे जाकर शालीनता से बात करें। मंच पर चढ़कर माइक छीनना और जनता के सामने अभद्र फब्तियां कसना केवल व्यक्तिगत कुंठा को दर्शाता है। यह घटना सभी इवेंट आयोजकों के लिए एक सबक है कि कला का आदान-प्रदान आपसी सम्मान और शालीनता के बिना अधूरा है।
निष्कर्ष
संक्षेप में, टिहरी मेले में घटी यह घटना भारतीय सांस्कृतिक मर्यादा पर एक काला धब्बा है। दलेर मेहंदी जैसे महान गायक, जिन्होंने दशकों तक अपने ऊर्जावान गीतों से करोड़ों दिलों को खुशी दी है, उनके साथ ऐसा व्यवहार कतई स्वीकार्य नहीं हो सकता।
राजपाल यादव ने जिस निडरता से अपने साथी कलाकार की बीमारी का सच सामने रखा और सत्ता के दंभ को चुनौती दी, उसने साबित कर दिया है कि कला जगत अपने आत्मसम्मान की रक्षा के लिए हमेशा एकजुट खड़ा रहेगा। इस विवाद ने सत्ताधीशों को यह कड़ा संदेश दिया है कि पद से बड़ा व्यक्तित्व होता है और हुकूमत से बड़ी इंसानियत। सिनेमा, संगीत और कला जगत से जुड़े ऐसे ही ज्वलंत मुद्दों और अंदरूनी रिपोर्टों के लिए Filmy Galaxy के साथ जुड़े रहें।




