बॉलीवुड इंडस्ट्री में जब भी ‘परफेक्शनिस्ट’ शब्द का जिक्र होता है, तो सबसे पहला नाम आमिर खान का दिमाग में आता है। लेकिन 90 के दशक के सबसे लोकप्रिय अभिनेताओं में से एक गोविंदा को लेकर हाल ही में एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने फैंस को चौंका दिया है। हालिया इंटरव्यू में जब Shagufta Ali on Govinda पर बात हुई, तो उन्होंने एक ऐसा सच उजागर किया जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। दिग्गज अभिनेत्री शगुफ्ता अली ने खुलासा किया है कि गोविंदा अपने काम को लेकर आमिर खान से भी कहीं ज्यादा बड़े परफेक्शनिस्ट रहे हैं।
90 के दशक में गोविंदा की कॉमेडी, उनका डांस और उनका अभिनय बॉक्स ऑफिस पर सफलता की गारंटी माना जाता था। डेविड धवन के निर्देशन में बनी फिल्म ‘हीरो नं. 1’ (1997) सुपरहिट साबित हुई थी। इस फिल्म में गोविंदा के साथ शगुफ्ता अली, करिश्मा कपूर, कादर खान और परेश रावल जैसे दिग्गज कलाकारों ने काम किया था। अब सालों बाद, जब Shagufta Ali on Govinda ट्रेंड कर रहा है, तो उस दौर की शूटिंग के ऐसे कई किस्से सामने आ रहे हैं जो गोविंदा के काम के प्रति उनके जुनून को दर्शाते हैं।
Shagufta Ali on Govinda: ‘हीरो नं. 1’ के सेट की वो अनदेखी बातें
सिद्धार्थ कनन को दिए एक इंटरव्यू में शगुफ्ता अली ने अपने करियर और बॉलीवुड के पुराने दिनों की यादों को साझा किया। इसी बातचीत के दौरान Shagufta Ali on Govinda का मुद्दा उठा, जहां उन्होंने गोविंदा की कार्यशैली के बारे में विस्तार से बताया।
शगुफ्ता अली के अनुसार, गोविंदा किसी भी सीन को आसानी से ‘ओके’ नहीं होने देते थे। आमतौर पर लोग आमिर खान को ही एक सीन के लिए बार-बार टेक लेने वाला अभिनेता मानते हैं, लेकिन शगुफ्ता अली का कहना है कि गोविंदा का स्तर इससे भी कहीं आगे था।
“लोग आमिर खान को परफेक्शनिस्ट कहते हैं, लेकिन मेरे हिसाब से गोविंदा उनसे भी बड़े परफेक्शनिस्ट हैं। एक-एक सीन को परफेक्ट बनाने के लिए वे 25-25 बार रिहर्सल किया करते थे। जब तक उन्हें खुद नहीं लगता था कि शॉट एकदम परफेक्ट है, वे संतुष्ट नहीं होते थे।”
Shagufta Ali on Govinda: 25 रिहर्सल और आमिर खान से तुलना
गोविंदा की कॉमिक टाइमिंग और स्क्रीन प्रेजेंस का हर कोई दीवाना है, लेकिन इसके पीछे की मेहनत को बहुत कम लोग जानते हैं। शगुफ्ता अली ने बताया कि ‘हीरो नं. 1‘ की शूटिंग के दौरान कई बार ऐसा होता था जब डायरेक्टर डेविड धवन शॉट को ‘ओके’ कह देते थे। डेविड धवन गोविंदा की टाइमिंग से पूरी तरह संतुष्ट हो जाते थे, लेकिन गोविंदा खुद को रोक लेते थे।
सोशल मीडिया पर Shagufta Ali on Govinda के इस बयान की काफी चर्चा हो रही है। शगुफ्ता अली ने आगे बताया:
“डायरेक्टर के ओके कहने के बावजूद गोविंदा कहते थे, ‘नहीं डेविड जी, एक और टेक लेते हैं, इसमें वो मजा नहीं आया।’ वे तब तक रिटेक लेते रहते थे जब तक कि सीन में शत-प्रतिशत परफेक्शन न आ जाए। यही वजह है कि उनकी कॉमेडी इतनी स्वाभाविक और असरदार लगती थी।”
आमिर खान जहां स्क्रिप्ट और कैरेक्टर की बारीकियों पर महीनों काम करने के लिए जाने जाते हैं, वहीं गोविंदा सेट पर ही सीन को बेहतर बनाने और उसे निखारने के लिए घंटों रिहर्सल करते थे। इसलिए Shagufta Ali on Govinda का यह कहना गलत नहीं होगा कि गोविंदा का परफेक्शनिज्म किसी से कम नहीं था।
Shagufta Ali on Govinda: लेट आने की आदत और कादर खान का रिएक्शन
गोविंदा के करियर के दौरान उनके लेट आने की आदत हमेशा सुर्खियों में रही है। शगुफ्ता अली ने इस इंटरव्यू में गोविंदा की इस आदत पर भी खुलकर बात की। जब उनसे पूछा गया कि क्या गोविंदा के लेट आने से सेट पर परेशानी होती थी, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के सच स्वीकार किया।
जब Shagufta Ali on Govinda पर बात आगे बढ़ी, तो अभिनेत्री ने बताया कि गोविंदा अक्सर सेट पर काफी देर से पहुंचते थे।
- शिफ्ट का समय: अगर सुबह 9 बजे की शिफ्ट होती थी, तो गोविंदा अक्सर दोपहर 1 या 2 बजे तक सेट पर पहुंचते थे।
- सह-कलाकारों की नाराजगी: इतने घंटे इंतजार करने के बाद कादर खान, परेश रावल और अन्य दिग्गज सह-कलाकार अक्सर उनसे नाराज और इरिटेट हो जाते थे।
- गोविंदा का रवैया: लेट आने के बावजूद गोविंदा सेट पर आते ही सबसे हाथ जोड़कर माफी मांगते थे। वे बहुत ही विनम्रता से सभी का गुस्सा शांत कर देते थे।
शगुफ्ता अली ने स्पष्ट किया कि भले ही गोविंदा लेट आते थे, लेकिन जब वे कैमरे के सामने आते थे, तो उनका काम इतना लाजवाब होता था कि सभी का गुस्सा पल भर में गायब हो जाता था। Shagufta Ali on Govinda का यह बयान साबित करता है कि उनका टैलेंट और परफेक्शन उनके हर ऐब को छुपा देता था।
दिल के साफ और मदद करने वाले इंसान
गोविंदा के काम करने के तरीके के साथ-साथ शगुफ्ता अली ने उनके व्यक्तित्व की भी जमकर तारीफ की। जब Shagufta Ali on Govinda का जिक्र हुआ, तो उन्होंने बताया कि गोविंदा के मन में कभी किसी के लिए कोई मैल नहीं रहता था। वे दिल के बेहद साफ और सेट पर हर किसी का मनोरंजन करने वाले इंसान थे।
90 के दशक में गोविंदा देश के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में से एक थे। इसके बावजूद, सेट पर उनका व्यवहार कभी घमंडी नहीं रहा। वे अपने सह-कलाकारों का सम्मान करते थे और हर शॉट में सह-कलाकार को भी उतना ही स्पेस देते थे जितना वे खुद लेते थे।
शगुफ्ता अली का मानना है कि गोविंदा जैसा ऑल-राउंडर कलाकार बॉलीवुड में दोबारा होना मुश्किल है, जो डांस, कॉमेडी, ड्रामा और एक्शन हर क्षेत्र में माहिर हो।
90s के सिनेमा पर गोविंदा का दबदबा
गोविंदा ने 90 के दशक में एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। ‘कुली नं. 1’, ‘हीरो नं. 1’, ‘दूल्हे राजा’, ‘साजन चले ससुराल’ और ‘बड़े मियां छोटे मियां’ जैसी फिल्मों ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। आज जब फैंस Shagufta Ali on Govinda के इस इंटरव्यू को देख रहे हैं, तो उन्हें अहसास हो रहा है कि गोविंदा की इस सफलता के पीछे कितनी कड़ी मेहनत और रिहर्सल छुपी हुई थी।
गोविंदा की कॉमिक टाइमिंग सिर्फ गॉड-गिफ्टेड नहीं थी, बल्कि उसके पीछे उनकी घंटों की प्रैक्टिस और सीन को बार-बार बेहतर बनाने की जिद थी। शगुफ्ता अली का यह इंटरव्यू गोविंदा के फैंस के लिए एक बेहतरीन तोहफा है, जो उनके चहेते स्टार के काम करने के अनोखे अंदाज को बयां करता है।
निष्कर्ष
शगुफ्ता अली के इस खुलासे के बाद यह साफ हो गया है कि परफेक्शनिज्म सिर्फ स्क्रिप्ट चुनने या लुक बदलने तक सीमित नहीं है। सेट पर रहकर एक सीन को 25 बार रिहर्सल करना और डायरेक्टर के ओके कहने के बाद भी बेहतर शॉट की मांग करना असली परफेक्शन है। Shagufta Ali on Govinda के इस इंटरव्यू ने गोविंदा की उस छवि को नया आयाम दिया है, जिसे अक्सर सिर्फ ‘मास एंटरटेनर’ कहकर देखा जाता था। गोविंदा न सिर्फ एक बेहतरीन एंटरटेनर थे, बल्कि सिनेमा के सच्चे परफेक्शनिस्ट भी थे।




